हरियाणा सरकार और प्रदेश वासियों के लिए मायूसी की खबर है। केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी बनाए जाने की योजना के तहत पहले चरण में जिन 20 शहरों को चुना गया है, उनमें हरियाणा के एक भी शहर को जगह नहीं मिली है।
हालांकि पड़ोसी राज्य पंजाब का लुधियाना शहर इस सूची में स्थान बनाने में सफल रहा है। देश भर के 98 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाए जाने की मुहिम के तहत वीरवार को केंद्र सरकार ने 20 शहरों की सूची जारी की, जिन्हें योजना के पहले चरण में स्मार्ट सिटी बनाया जाना है। इसके बाद अगले दो वर्षों के दौरान 40 और 38 शहरों को सूचीबद्ध किया जाएगा।
योजना के पहले चरण में हरियाणा के किसी भी शहर का न चुना जाना प्रदेश सरकार के लिए भी जोरदार झटका है, क्योंकि सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के जरिए फरीदाबाद और करनाल शहरों को स्मार्ट सिटी बनाए जाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को इन शहरों का योजनाबद्ध प्रस्ताव भेजा था।
प्रस्ताव में दोनों शहरों को अत्याधुनिक और डिजिटल रूप देने की योजना बताई गई थी। इन शहरों के अलावा प्रदेश सरकार गुड़गांव शहर को भी स्मार्ट सिटी बनाने की एक अलग मांग केंद्र सरकार के समक्ष रख चुकी है, लेकिन पहलो 20 शहरों में ही जगह बना पाने के कारण प्रदेश सरकार के लिए हरियाणा के बाकी शहरों को लेकर दबाव बनाना भी निरर्थक हो गया है। इस संबंध में वीरवार को सरकार के उच्चाधिकारी प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।
फरीदाबाद व करनाल के लिए यह भेजा था प्रस्ताव
राज्यस्तरीय हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी द्वारा तैयार प्रपोजल में दोनों शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए विस्तृत खाका खींचा गया था। यह प्रपोजल गत 15 दिसंबर को करनाल व फरीदाबाद प्रशासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजे गए थे।
माना जा रहा था कि फरीदाबाद चूंकि पहले से ही काफी विकसित शहर है, इसलिए करनाल को स्मार्ट सिटी बनने का अवसर अवश्य मिल जाएगा। प्रपोजल में करनाल शहर के लिए 1220 करोड़ रुपये और फरीदाबाद शहर के लिए 1000 करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित की गई थी।
खास बात यह भी है कि प्रत्येक प्रपोजल दो भागों में तैयार किया गया था, जिसके तहत एक हिस्से में, शहर में मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने का खाका खींचा गया था और दूसरे हिस्से में, अधिकांश सेवाएं आनलाइन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
हरियाणा की शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के मुताबिक स्मार्ट सिटी की पहली सूची में हरियाणा के शहरों को नाम क्यों नहीं आया, इस बारे में अफसरों से पूछताछ की जाएगी और दूसरी सूची में प्रदेश के दोनों शहरों के नाम शामिल कराने के प्रयास किए जाएंगे।