पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम निवासी मेजर नीरज यादव के ससुर की आत्महत्या के मामले में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ससुर ने यादव और उसके परिवार का सुसाइड नोट में नाम लिखा है और गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में याची को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। याचिका दाखिल करते हुए नीरज यादव ने बताया कि उसका पत्नी से विवाद चल रहा था।
इसी के चलते उसकी पत्नी ने उसके और उसके परिवार वालों के खिलाफ शिकायत दी थी। उसकी पत्नी पिछले कई महीने से उससे अलग रह रही थी और वह लगातार 20 से 25 हजार रुपये की राशि गुजारा भत्ता के रूप में पत्नी को दे रहा था। इसी बीच एक दिन याची को खबर मिली कि उसके ससुर ने फंदा लगातार आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में याची, उसके भाई तरुण यादव, मां स्नेहलता यादव तथा पिता हरपाल सिंह यादव का नाम लिखा है।
याची ने कहा कि उनका अब शिकायतकर्ता पत्नी के परिवार से कोई लेना देना नहीं है और ऐसे में उसे इस मामले में अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। याची ने कहा कि उसके भाई को अंतरिम अग्रिम जमानत, मां-बाप को अंतरिम जमानत का लाभ पहले ही मिल चुका है। याची ने कहा कि ससुर की मौत के लिए याची नहीं बल्कि उसकी पत्नी खुद जिम्मेदार है।
याची ने कुछ पत्रों का हवाला देते हुए बताया कि याची की पत्नी अपने पिता को इज्जत नहीं देती थी। पत्नी ने मनमाने आरोप लगाए हैं जिसके कारण याची के घर का माहौल भी खराब हुआ और इसी के चलते शिकायतकर्ता के पिता ने आत्महत्या की। हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने याची पर गंभीर आरोप लगाए हैं और वहीं मृतक ने सुसाइड नोट में याची का नाम लिखा था। ऐसे में इस मामले में आगे जांच जरूरी है और याची को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।