इसके बावजूद जी खान संत समाज के साथ-साथ हिंदू समाज से माफी मांगना चाहते थे। उन्होंने हिंदू नेताओं से संपर्क किया तो सभी ने संत समाज के महंत नारायण दास पुरी से कहकर पंजाबी सिंगर जी खान को प्राचीन संगला वाला शिवाला मंदिर में बुला लिया। जहां जी खान ने महंत नारायण दास पुरी के चरणों में बैठ माफी मांगी और इसके बाद शिवाला में जाकर भगवान भोलेनाथ के समक्ष माफी मांगी। इतने में कुछ असामाजिक तत्व व खुद को हिंदू समाज के रक्षक कहने वाले नेता वहां पहुंचे और उन्होंने मंदिर प्रांगण में नारेबाजी शुरू कर दी।
महंत नारायण दास पुरी ने उन्हें समझाने की कोशिश की और कहा कि व्यक्ति भगवान के घर आकर माफी मांग रहा है, उसे माफ करने में कोई हर्ज नहीं। इतने में वह वह भड़क गए और उन्होंने महंत नारायण दास पुरी जी से दुर्व्यवहार किया। इतने में सामने से हिंदू संगठनों में आपस में कहासुनी हो गई।
एक-दूसरे को मंदिर प्रांगण में ही गाली दी और हाथापाई करने लगे। किसी तरह से झगड़ा करने वालों को बाहर निकाला गया और मंदिर के बाहर भी खुद को हिंदू नेता बताने वाले भिड़ते नजर आए। वह आपस में ही मंदिर प्रागंण से लड़ते-लड़ते बाहर पहुंच गए और जमकर मंदिर की मर्यादा को भंग किया।
मामला कुछ शांत हुआ तो हिंदू संगठनों के कुछ सदस्य अंदर चले गए तो कुछ धर्म के ठेकेदार बाहर खड़े थे। इतने में उनके कुछ लोग और आ गए। आते ही हमलावरों ने कुछ नहीं देखा तो मंदिर प्रांगण में ईंट-पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। रविवार होने की वजह से मंदिर के अंदर भीड़ ज्यादा थी। ईंट-पत्थर चलने के बाद वहां भगदड़ मच गई। ईंट-पत्थर चलाते हुए हमलावर मंदिर के बाहर तक आ गए। इसी दौरान शिवसेना पंजाब के नेता भानू प्रताप बाहर खड़े थे। हमलावरों के हाथ वह लग गए और उन्होंने जमकर धुनाई की।