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चंडीगढ़ नगर निगम के अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन ही नहीं, हर रोज आते डॉग बाइट के 15 मामले

Mon, 08 Jul 2019 10:55 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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चंडीगढ़ नगर निगम के कई प्रयासों के बावजूद चंडीगढ़ डॉग बाइट के केसों से अछूता नहीं है। यहां हर रोज 15 से 20 मामले अस्पताल में पहुंचते हैं। बड़ी बात यह है कि नगर निगम ने अब तक एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए टेंडर ही नहीं किया है जबकि सदन की बैठक में पार्षद कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं।
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अधिकारियों का कहना है जल्द टेंडर करके एंटी रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति की जाएगी। नगर निगम की ओर से सेक्टर-38 व 19 स्थित हेल्थ सेंटर में डॉग बाइट के मरीजों के लिए स्पेशल डिस्पेंसरी बनाई गई है। कई माह से वहां एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। जून माह में हुई निगम की बैठक में पार्षदों ने जोरशोर से इस मुद्दे को उठाया था।

कमिश्नर केके यादव ने जब एमओएच डॉ. एपी सिंह से पूछा तो उन्होंने कहा कि जल्द टेंडर कर इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। पिछली बार जब टेंडर किए गए थे तो सिंगल पर्सन होने के कारण वैक्सीन नहीं खरीदी गई थी। कमिश्नर ने निर्देश दिया कि जल्द टेंडर कर वैक्सीन मंगवाई जाए। वहीं, एमओएच का कहना है तीन दिन में टेंडर लेने वाली कंपनी वैक्सीन की सप्लाई कर देगी।
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मासूमों की मौत के बावजूद नहीं लग रही लगाम

पहले वर्ष 2017 में पांच की बच्ची सादिया को मनीमाजरा में कुत्तों ने काट लिया था। कुत्तों ने बच्ची के हाथ व कान में घाव किए थे। पीजीआई में भर्ती करने के बाद चंडीगढ़ में कहीं भी सीरम नहीं मिला। उसके बाद अंबाला से सीरम मंगाया गया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्ची की मौत हो गई। उसकी मौत से आक्रोशित पिता ने तत्कालीन मेयर से भी झगड़ा कर लिया था।

इसी तरह जून 2018 में सेक्टर 18 में डिवाइडिंग रोड के साथ लगते पार्क में खेलते समय डेढ़ साल के मलोया निवासी आयुष को कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला था। उसके बाद शहर में एक अभियान चल गया। लोगों में आक्रोश इतना ज्यादा था कि इंसाफ के लिए सड़क पर उतर गए।

मामला यही शांत नहीं हुआ लोगों ने निगम पर भी कुत्तों को पकड़ने के लिए दबाव बनाया। निगम ने काफी कोशिश की, लेकिन विफल रहा। इन मामलों के अलावा हर रोज गंभीर मरीज हॉस्पिटल जाते रहे, लेकिन कुत्तों पर लगाम लगाने में निगम नाकाम रहा।

कोर्ट ने भी लगाई थी फटकार
डॉग बाइट के मामले में प्रशासन व निगम को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक तलब कर चुका है। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के अधिकारियों ने भी ज्वाइंट मीटिंग बुलाई है, लेकिन इस समस्या का कोई हल नहीं निकल सका है।
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हेल्थ डिपार्टमेंट को भी कई दिनों बाद आई सुध

वैक्सीन की कमी के कारण जब हाहाकर मचा तो हेल्थ डिपार्टमेंट की नींद खुली। उसके बाद सेक्टर 10, 22, 45 और मनीमाजरा के हेल्थ सेंटरों में तत्काल वैक्सीन मंगाई गई। उससे पहले जो मरीज हेल्थ सेंटर पहुंचे थे तो उन्हें कहा जाता था कि और मरीज आने पर ही वैक्सीन खोलेंगे क्योंकि वैक्सीन कम है इसलिए एक में से दो लोगों को वैक्सीन लगाएंगे। बाद में पूछने पर अधिकारियों ने कहा कि टेंडर करने वाली कंपनी ने सप्लाई में देरी कर दी।

दो लाख रुपये में हेल्थ डिपार्टमेंट ने खरीदी वैक्सीन
लोगों का दबाव बढ़ा तो हेल्थ डिपार्टमेंट ने दो लाख रुपये की वैक्सीन खरीदी। इसके अलावा निगम नग के हिसाब से कंपनी को पेमेंट करेगा। जितनी वैक्सीन की खपत होगी, उसका पेमेंट होगा। वैसे प्रति नग लगभग 250 रुपये का निगम को पेमेंट करना है। हालांकि अभी डिस्पेंसरी में वैक्सीन नहीं आई हैं।

इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा समस्या
मनीमाजरा, सेक्टर 15, 20, 19, 28, 29, 520 53, 38 वेस्ट, डड्डूमाजरा में कुत्तों का काफी आतंक है।

रोजाना 300 कुत्तों का स्टेरलाइजेशन
निगम ने हर माह 300 कुत्तों का स्टेरलाइजेशन दावा किया है। निगम का कहना है कि इसके लिए मध्य प्रदेश की एक कंपनी से कॉन्ट्रेक्ट किया गया है। स्टेरलाइजेशन से कुत्तों की आबादी नहीं बढे़गी। वहीं जिन क्षेत्रों में समस्या ज्यादा है वहां विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है।   
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