बेशक हरियाणा सरकार प्रदेश में भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करती हो लेकिन सच ये है कि अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत मांगने और लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक ही प्रदेश में हर दूसरे दिन भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारी या कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
खास बात ये है कि केवल पुलिस, राजस्व विभाग, मंडी बोर्ड ही नहीं आईटीआई और स्कूलों के प्रिंसिपल तक भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए हैं। बीते पखवाड़े के दौरान 1.66 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत लेते पकड़े गए आरोपियों में आईटीआई प्रिंसिपल, दो पुलिस अधिकारी, दो पटवारी, एक ग्राम सचिव और एक ऑक्शन रिकॉर्डर सहित सात आरोपी शामिल हैं। ये आरोपी करनाल, गुरुग्राम, पानीपत, कैथल, सिरसा और भिवानी जिलों में तैनात थे।
कौशल रोजगार निगम के तहत नौकरी के नाम पर भी मांगे जा रहे पैसे
हरियाणा सरकार द्वारा कच्ची भर्तियों को लेकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम का गठन किया गया है। इसमें पहले से अन्य विभागों में तैनात कच्चे कर्मचारियों को समायोजित किया जा रहा है। इसी के बदले कई विभागों में भ्रष्टाचार चल रहा है। इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने आईटीआई भिवानी के प्राचार्य अनिल कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत लगे कर्मचारियों से नौकरी पर बने रहने के लिए 12 हजार रुपये की मांग कर रहा था। ब्यूरो के पास अन्य विभागों से भी ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं।
साल 2022: 170 मामलों में 220 आरोपी काबू
साल 2022 की बात करें तो विजिलेंस ब्यूरो ने कुल 170 जगह छापेमारी कर 220 सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों व प्राइवेट व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 2,000 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की रिश्वत बरामद की गई। इसके अलावा, ब्यूरो ने 19 विशेष जांच और तकनीकी जांचों की रिपोर्ट भी सरकार को भेजी।
इनमें से 11 कार्यों में 28 राजपत्रित अधिकारियों व 13 अराजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की गई। साथ ही 73,05,647 रुपये की वसूली संबंधित एजेंसी से करने की सिफारिश की गई और एक कार्य में तीन राजपत्रित अधिकारियों व दो अराजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक मुकदमा दर्ज की अनुशंसा की गई।