फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चले गए अंजुमः कल जहां शायरी थी, आज वहां सन्नाटा है

Fri, 10 Jul 2015 01:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
विज्ञापन
विज्ञापन
सेक्टर-2 की सुनसान पड़ी कोठी नंबर-421ए...जिस घर से कभी शायरी की फुहार निकलती थी, अब वहां न अल्फाज रह गए, न तरन्नुम....बस यहां थी एक होंडा की लंबी सी कार और हमेशा की तरह लटकते हुए सफेद पर्दे।
विज्ञापन


एकदम से घंटी बजती है...और लगता है कि अब सरदार अंजुम साहब अपनी चिर परिचित मुस्कान में दरवाजा खोलेंगे....बस अब....अब नहीं...शायर अब विदा हो गया। बची हैं तो चंद यादें....जिनको बरसों जमाना याद करेगा।

कोठी की यह खामोशी अब खामोश हो चुके शायर की उन यादों को ताजा कर रही थी जिसमें उनकी मुस्कान थी और उनका प्यार। उनके घर के ठीक पड़ोस में रहने वाले रवि वर्मा ने जैसे ही उनकी मौत की खबर सुनी तो सन्न रह गए।
विज्ञापन


बोले, अभी मैं उनकी पत्नी से फोर्टिस में मिलकर आया था। कह कहीं थी कि हालत थोड़ी खराब है। उन्होंने कहा कि सरदार अंजुम को कभी नहीं भुला सकेंगे। ऐसा शायर पड़ोसी शायद ही मिले। उन्होंने कहा कि अक्सर सरदार अंजुम के पास जाते थे, सरदार साहब ने हमेशा उनको अपनी लेटेस्ट शायरी सुनाई।

कोठी में उनका ऊपर का कमरे में रखी ट्राफियां और उनके कैसेट्स उनकी याद दिला रहे थे। वास्तव में सरदार अंजुम की शायरी खास थी, कारण, वह तो बोलते भी शायरी में थे।

जो बोलते वही शेर बन जाता और जरा सा तरन्नुम में आए तो गीत। उनके पड़ोसी शिवम वर्मा ने कहा कि सरदार अंजुम से उनको काफी कुछ सीखने को मिला। शायर और शायरी का असली अर्थ उनके पास सीखा।

यहां के रहने वाली शमीना ने कहा कि वास्तव में इस कोठी के सामने से निकलते हुए काफी फख्र महसूस होता था और होता रहेगा।

हालांकि सरदार सरदार अंजुम के ज्यादातर पड़ोसियों ने उनको घर से निकलते हुए ही देखा और घर में जाते हुए ही। वह बताते हैं कि वह तो यदा कदा ही बाहर आते थे।

उनसे मिलने जाते थे तो वह अपने कमरे में ले जाते थे। सेक्टर में पंचकूला सेक्टर-2 में सरदार अंजुम की मौत की खर जैसे ही उनके पड़ोसियों को मिली तो किसी ने अपना प्रोग्राम कैंसल कर दिया तो कोई अंजुम साहब की पत्नी से मिलने के लिए फोर्टिस चला गया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें