भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के बाद गरमाई प्रदेश की सियासत में अभी बहुत कुछ होना बाकी है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुसीबतें भविष्य में और बढ़ सकती हैं। इसके संकेत हरियाणा भाजपा प्रभारी डा. अनिल जैन ने दिए हैं।
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. अनिल जैन ने कहा है कि आने वाले समय में हुड्डा पर और एफआईआर दर्ज हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में हुड्डा ने स्वयं हस्ताक्षर किए हैं। लिहाजा ‘उनके लिए दरवाजे खुले हैं’।
जैन ने कहा कि हमारी सरकार किसी तरह का बदला नहीं ले रही है। जो गलत काम किए हैं, उसकी सजा हुड्डा को मिल रही है। एक के बाद एक और एफआईआर दर्ज होने से हुड्डा बौखला गए हैं। हुड्डा की ओर से उठाए गए चौधरी देवीलाल ट्रस्ट की जमीन संबंधी जांच पर जैन ने कहा कि हुड्डा खुद 10 साल मुख्यमंत्री रहे हैं तब उन्होंने इस ट्रस्ट की जांच क्यों नहीं करवाई। अब उन्हें जांच की बात कहने का भी कोई हक नहीं है।
हुड्डा एक ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री हैं,जब उन्हें लगा कि उनकी सरकार जा रही है तो उन्होंने कैबिनेट में फैसला कर पूर्व सीएम को कैबिनेट का दर्जा दे दिया। सरकार ने इसी वजह से कैबिनेट का यह फैसला रद्द किया है। हुड्डा पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन का सूत्रधार कौन है? इसके पूरे साक्ष्य सरकार के पास हैं। रोहतक, सोनीपत और झज्जर किसका क्षेत्र है। इस बात से प्रदेश की जनता भलीभांति वाकिफ है। पूर्व सीएम के राजनीतिक सलाहकार के पकड़े जाने से यह बात और स्पष्ट हो गई है।