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पिता की मौत से गुस्साई बेटी ने रेजिडेंट डॉक्टर को मारा थप्पड़

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चंडीगढ़। पीजीआई की मेडिकल इमरजेंसी में सोमवार देर रात इलाज में देरी से पिता की मौत हो जाने से गुस्साई बेटी ने ऑन ड्यूटी रेजिडेंट डॉक्टर को थप्पड़ मार दिया। उसके बाद यह मामला थाने भी पहुंचा, लेकिन आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर मंगलवार सुबह 4 बजे तक पीड़ित रेजिडेंट डॉक्टर को थाने में बैठाए रखा गया।
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इस घटना से नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार की सुबह पीजीआई निदेशक कार्यालय के बाहर एकत्र होकर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद पीजीआई निदेशक समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की। इसमें ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कई बिंदुओं पर निर्णय लिया गया।
पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि सोमवार की रात इमरजेंसी में सीटी स्कैन कराने आए एक मरीज की हालत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर ने मरीज को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। रात 10.52 बजे मरीज को मृत घोषित कर दिया गया। यह सुनते ही मरीज की बेटी ने इलाज में लापरवाही और देरी का आरोप लगाते हुए रेजिडेंट डॉक्टर को थप्पड़ मार दिया। हालांकि, आरोपी के महिला होने के नाते उस वक्त जवाब नहीं दिया गया, लेकिन इसकी सूचना तत्काल थाने को दी गई। इसके बाद मौके पर आई पीजीआई चौकी पुलिस रेजिडेंट डॉक्टर को अपने साथ थाने ले गई। थाने में पूछताछ के नाम पर रेजिडेंट डॉक्टर को सुबह 4 बजे तक रोके रखा गया।
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इन बिंदुओं पर बनी सहमति
संस्थान में किसी भी डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना होने पर पीजीआई आरोपी के खिलाफ शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवाएगा।
ऐसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एक कमेटी गठित करने का भी निर्णय लिया गया, जो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कराएगी।
अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत की स्थिति में परिजनों की काउंसलिंग के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और काउंसलर तैनात किए जाएंगे।
इमरजेंसी समेत अन्य स्थानों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने व हर शिफ्ट में महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती होगी।
जांच की जा रही
पुलिस अधिकारी का कहना है कि दोनों पक्षों को रात दो बजे पीजीआई चौकी लाया गया गया था। उनका मेडिकल करवाने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर के बयान दर्ज किए गए। इसमें एक से डेढ़ घंटे का समय लगा। आरोपी महिला के मुताबिक डॉक्टर ने उसे पहले धक्का मारा था, जबकि डॉक्टर का आरोप है कि उसे युवती ने थप्पड़ मारा था। फिलहाल, डीडीआर दर्ज कर ली गई है। मामले में जांच चल रही है।
पीजीआई प्रशासन ने डॉक्टर के साथ मारपीट के मामले में व्यक्तिगत की बजाय संस्थान की ओर से एफआईआर की मांग को सही ठहराया है। अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट पर रोक लगाने के लिए सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और काउंसलर की तैनाती का भी आश्वासन दिया गया है। इलाज के दौरान मरीज की मौत होने पर परिजनों को समझाना बेहद जरूरी होता है, ताकि वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके और मारपीट जैसी स्थिति न उत्पन्न हो। -डॉ. राहुल चक्रवर्ती, निर्वाचित अध्यक्ष, पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन
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