चंडीगढ़। पीजीआई के नर्सिंग इंस्टीट्यूट की 2022 की पास आउट छात्राओं ने बुधवार को निदेशक के खिलाफ प्रदर्शन किया। निदेशक कार्यालय के बाहर लगभग 200 से अधिक छात्राओं ने एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की। पास आउट छात्राओं के समर्थन में तीनों वर्ष की छात्राएं भी उतर आईं। छात्राएं पीजीआई प्रशासन द्वारा उन्हें नौकरी देने से इनकार करने पर रोष में थीं। उनका कहना है कि संस्थान में नर्सिंग ऑफिसर के सैकड़ों पद खाली हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन मनमानी कर उन्हें नौकरी देने से मुकर रहा है। छात्राओं ने सुबह 10 से दोपहर 1.30 बजे तक निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद चिकित्सा अध्यक्ष डॉ. विपिन कौशल को मांगपत्र सौंपा। इसके बाद निदेशक प्रो. विवेक लाल से मुलाकात भी की। प्रो. विवेक लाल ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि वे उनकी परेशानी को समझ रहे हैं लेकिन मामला कैट में होने के कारण वे अब वे कोर्ट के आदेशानुसार ही कार्य करेंगे। प्रदर्शन कर रही छात्रा राजवीर कौर, निशा और शबनम ने बताया कि एडमिशन के समय बॉन्ड भरवाया गया था कि संस्थान नौकरी देगा। ऐसा पहले से होता आ रहा है, लेकिन इस बार अचानक से व्यवस्था बदल दी गई है, जब पीजीआई प्रशासन ने छात्राओं को संस्थान में नौकरी देने से मना किया है। छात्राओं को समर्थन देने के लिए पीयू के एनएसयूवाई के सदस्य, युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मनोज लुबाना और वार्ड 13 के पार्षद सचिन गालव भी मौजूद थे। उन सभी ने पीजीआई प्रशासन के इस निर्णय को गलत ठहराया है।
देश में अपने तरह का एकमात्र संस्थान पीजीआई
नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष मंजनीक ने बताया कि पीजीआई देश में एकमात्र ऐसा संस्थान है जो बीएससी नर्सिंग स्टूडेंट से एडमिशन के समय बांड भरवाता है, जिसमें लिखा होता है कि वे उत्तीर्ण होने के बाद पीजीआई की जरूरत के अनुसार पहले यहां नौकरी करेंगी। अगर ऐसा ना हुआ तो उन्हें बांड में लिखित धनराशि पीजीआई को चुकानी होगी। ऐसे में पिछले वर्ष की छात्राओं ने अगस्त में ही कोर्स पूरा कर लिया, जिसका रिजल्ट नवंबर में आ गया था। लेकिन अब तक पीजीआई प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर रहा था कि उन्हें नौकरी देगा कि नहीं। जिस पर छात्राओं ने फरवरी में कैट में अप्लाई किया। अब पीजीआई ने छात्राओं को नौकरी देने से मना करने का निर्णय लिया है। ऐसे में छात्राओं के पांच महीने बर्बाद करने के बाद यह निर्णय लेने का क्या मतलब है।
पद खाली पर नियुक्ति में आनाकानी
प्रदर्शन कर रही नर्सिंग छात्राओं का कहना है कि पीजीआई प्रशासन को उनमें से किसी छात्रा को अपनी नौकरी नहीं देनी थी तो वह रिजल्ट आने पर ही स्पष्ट कर सकते थे। अब उनका यह कहना है कि नाइन हमारी नियुक्ति के मानकों में शामिल नहीं है। वही वे कोर्ट में विचाराधीन पिछले मामले का भी हवाला दे रहे हैं। इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी कहा है कि उन्हें नर्सों की जरूरत नहीं है जबकि अगर पीजीआई की स्थिति देखी जाए तो नर्सिंग ऑफिसर के लगभग 250 पद खाली पड़े हैं।