हरियाणा के बुजुर्ग एक किस्सा अक्सर सुनाते हैं। चीनी यात्री ह्वेन सांग ने अपनी यात्रा के दौरान जब किसी हरियाणवी महिला से पानी मांगा तो उसने पानी की जगह दूध का लोटा भरकर दे दिया। ह्वेन सांग ने कहा कि उन्होंने तो पानी मांगा था।
जवाब में हरियाणवी महिला ने कहा, हमारे यहां मेहमानों को पानी पिलाने की परंपरा नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से हमारे यहां परंपरागत जल संरचनाओं की बर्बादी हुई है, उसे देखकर तो लगता है कि दूध तो दूर की बात है, हरियाणा में पानी का ही गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए गए यहां के तालाब अतिक्रमण, गंदगी और कस्बे के मल-मूत्र के गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे विशिष्ट तालाब भी नहीं बचे जिनका सेठ अपने लिए इस्तेमाल करते थे या जो राजसी थे।
यहां के भिवानी रोड पर स्थित पुलिस थाने के लगभग सामने बने लाला जानकीदास के तालाब की हालत देखकर यही लगता है। इस भव्य तालाब की चहारदीवारी अब भी बची है, लेकिन इसकी हालत अच्छी नहीं है। इसमें से ईंटें निकलने लगी हैं। सुंदर और घनी छाया वाले वृक्ष अब भी हैं।
बेरी के तालाबों में यह अकेला तालाब है, जिसके रखरखाव के लिए बाहरी चहारदीवारी है और चौकीदारी की व्यवस्था है। तकरीबन 30 फुट गहरे इस तालाब में अब भी 12-15 फुट तक पानी जमा है, लेकिन यह सड़ांध मारता है। चारों घाट अंदर की ओर धंसने लगे हैं।
घाटों और भीतरी चहारदीवारी के निर्माण पर 50 लाख से अधिक लखौरी ईंटे लगने का अनुमान है। इसकी चौकीदारी का जिम्मा 55 वर्ष की भतेरी के परिवार पर है। उनके बेटे राजमिस्त्री प्रदीप का परिवार भी यहीं रहता है। बकौल भतेरी लंबे अरसे से इस तालाब की कोई संभाल नहीं हो रही। कई लोग मानते हैं कि यह तालाब सेठों ने अपने लिए ही बनवाया था। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश शर्मा बताते हैं, तकरीबन 60 साल पहले तक सर्दियों में इस तालाब पर कड़ाहों में पानी गर्म होता था।
जो लोग यहां नहाने आते थे, वे तालाब से एक बाल्टी पानी लाकर कड़ाहे में डाल देते थे और इसके बदले एक बाल्टी गर्म पानी ले लेते थे। तालाब पर गऊ घाट भी बना है। तैराकी प्रतियोगिता के लिए भी इस तालाब का इस्तेमाल होता था। इससे जाहिर है कि यह तालाब सबके लिए था।
स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है तालाब
तालाब कई सौ साल पुरानी स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है। यह यहीं के कुंभकारों की ईंटों से बना है। यहीं के राजमिस्त्रियों ने इसे बनाया, लेकिन इसका कलात्मक शिल्प और मजबूती देखकर लगता है मानो इसका निर्माण मुगलकालीन राजमिस्त्रियों ने किया है। तालाब के पास तकरीबन पांच फुट ऊंचाई पर राजमहल सा बंगला है। इसमें प्रवेश के लिए 16 दरवाजे हैं। दर्जनों रोशनदान और खिड़कियां हैं।
इन रोशनदानों में लगे 250 से अधिक शीशे बताते हैं कि तालाब की सुंदरता और उपयोगिता बढ़ाने के लिए सेठ जानकीदास ने इस पर काफी धन खर्च किया होगा। इसके चारों ओर 32 खूबसूरत दरवाजे हैं। पत्थर के बने 64 स्तंभ बरामदों की खूबसूरती और मजबूती बढ़ाते हैं। खूबसूरत छोटे-छोटे घर भी तालाब के एक ओर बनाए गए हैं।