सुप्रीम कोर्ट की ओर से आनंद कारज मैरिज एक्ट में भी विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने का आदेश जारी हुए नौ साल हो चुके हैं। इस मामले में राज्यों को नियम बनाने हैं, लेकिन हरियाणा को छोड़ किसी अन्य राज्य में नियम ही नहीं बने।
यहां तक कि सिख बहुल राज्य पंजाब में भी नहीं। एडवोकेट नवकिरन सिंह की ओर से आरटीआई के तहत एकत्र की गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।
नवकिरन सिंह ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सिखों के लिए आनंद मैरिज एक्ट साल 1909 में ही अस्तित्व में आ चुका था, लेकिन इसमें सिख रवायत के हिसाब से आनंद कारज के माध्यम से रचाई गई शादी के मामले में पंजीकरण का प्रावधान नहीं था।