लोकसभा चुनाव दहलीज पर, उसके बाद विधानसभा चुनाव... फिर भी शुक्रवार को पेश किया गया हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का बजट चुनावी नहीं था। आम तौर पर चुनावी बेला में लोकलुभावन बजट देने का चलन है। इसलिए यह कुछ को नीरस लग सकता है लेकिन घोषणाओं के अंबार से सभी को खुश करने के बजाय इसे भविष्य के हरियाणा का बजट कहा जा सकता है।
यह बजट खेत, किसान व गांव की चिंता करने वाला है जिसमें स्वरोजगार, स्वावलंबन, सामाजिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता झलकती है। हालांकि कुछ घोषणाएं व योजनाएं पुरानी हैं और कुछ वर्ग व क्षेत्र छूट गए हैं लेकिन बजट में उतना ही देने की कोशिश है जिससे राज्य की राजकोषीय जिम्मेदारी का भी ध्यान रखा जा सके। घाटा तीन प्रतिशत से बढ़ने नहीं दिया गया। यानी अगली सरकार चाहे जिसकी बने, बोझ वैसा नहीं होगा जैसा चुनावी वादों की गठरी का होता है।
ऐसे समय में, जब किसान आंदोलित हों और एमएसपी के साथ ही कर्जमाफी भी उनकी मांग हो, मनोहर लाल ने कर्जमाफी न सही, कर्ज पर ब्याज व जुर्माना सशर्त माफ करने की बड़ी घोषणा की है जिससे पांच लाख किसानों को फायदा हो सकता है। नहरी पानी का इस्तेमाल करने वालों का आबियाना माफ करके सदी से इसे झेलते आ रहे किसान के कंधों को हल्का करने का प्रयास हुआ है।
हर जिला मुख्यालय में सार्वजनिक पुस्तकालय, उड्डयन महाविद्यालय, सशस्त्र बल संस्थान, मुक्केबाजी-कुश्ती के दो उच्च प्रशिक्षण केंद्र खोलने और कौशल प्रशिक्षण के लिए मिशन 60 हजार जैसी घोषणाएं आश्वस्त करती हैं कि बजट बनाते हुए दीर्घकालीन हित के लिए नई दिशाएं तलाशने का ध्यान रखा गया है। पशुपालन, मत्स्य पालन, पर्यटन व ऊर्जा क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं देखी गई हैं। रोजगार की संभावनाएं तलाशते हुए 100 करोड़ का ड्रोन स्टार्ट अप फंड अगर अपने मकसद में कामयाब रहा तो यह हरियाणा की नई उड़ान होगी। संभावनाओं के फलक पर नई उड़ान में आधी दुनिया को भी शामिल करके ड्रोन दीदी बनाने का कॉन्सेप्ट भी कामयाब रहा तो एक नजीर होगी।
शहीदों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि दोगुना व पूर्व सैनिकों को मिलने वाली सम्मान राशि में वृद्धि करके किसान के साथ-साथ जवान की भी जय जय करने की कोशिश की है। गांवों में आवासीय सुविधा और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रावधान करता यह बजट ग्रामीण विकास के साथ-साथ स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी मुखर है। लगता है कि बजट बनाने वाले अफसरों ने शेर-ओ-शायरी के बजाय 360 डिग्री होमवर्क किया है।
इसे ज्ञान यानी गरीब, युवा, अन्नदाता व नारी का बजट बताते हुए मुख्यमंत्री ने यह इंगित किया कि फिजूलखर्ची की प्रवृत्ति का विरोध करने का प्रयास किया गया है। यह तब और भी जरूरी हो जाता है जब इन उजली प्रतीत होने वाली घोषणाओं को कर्ज व कर की सीढ़ियां चढ़कर मंजिल पानी हो। हरियाणा में सकल राज्य घरेलू उत्पाद व प्रति व्यक्ति आय देश की औसत से ज्यादा होना अच्छी बात है लेकिन पूर्णतः आत्मनिर्भर बनने के लिए अभी और संसाधन तलाशने होंगे। आशा है कि सभी घोषणाएं धरातल पर उतरेंगीं।