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Chandigarh News: नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी की समीक्षा के लिए 11 सदस्यीय कमेटी गठित

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चंडीगढ़। नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और लोगों की मांग के बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नीति की समीक्षा के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी 3 जनवरी 2023 को जारी नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी की अधिसूचना का दोबारा रिव्यू करेगी और आवश्यक संशोधनों के साथ नया ड्राफ्ट तैयार करेगी।
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यह कमेटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के निर्देश पर गठित की गई है। प्रशासक ने कमेटी को तीन सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। कमेटी की अध्यक्षता एस्टेट विभाग के सचिव करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगी थी रोक
नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी को 3 जनवरी 2023 को अधिसूचित किया गया था, जिसमें पुराने नियमों में जरूरी बदलाव करते हुए कुछ छूट दी गई थी। हालांकि 10 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस नीति को लागू करने पर रोक लग गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) फ्रीज करने और उसमें किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही संपत्ति के विभाजन, फ्लोर वाइज रजिस्ट्री और सेक्टर-1 से 30 (फेज-1) में एफएआर को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए थे।
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60 हजार सीएचबी मकानों से जुड़ा है मामला
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के करीब 60 हजार मकानों में रहने वाले लोग लंबे समय से जरूरत आधारित बदलावों को लेकर नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय के साथ परिवार बढ़ने और जरूरतें बदलने के कारण मकानों में सीमित बदलाव जरूरी हो गए हैं।
कमेटी में ये अधिकारी शामिल
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने बताया कि कमेटी में सीएचबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यूटी के लीगल रिमेंब्रेंसर, सीएचबी सचिव, यूटी के चीफ आर्किटेक्ट, सीनियर टाउन प्लानर, सीएचबी के चीफ इंजीनियर, चीफ अकाउंट्स ऑफिसर, सीनियर लॉ ऑफिसर, आर्किटेक्ट, प्रवर्तन अधिकारी शामिल किए गए हैं। प्रवर्तन अधिकारी कमेटी के सदस्य संयोजक होंगे।
पुराने नोटिस होंगे रद्द, 30 हजार मकानों को राहत
सीएचबी अधिकारियों के अनुसार, नई नीड बेस्ड चेंज पॉलिसी में पुराने नोटिसों को रद्द करने का प्रावधान भी किया जा सकता है। इससे करीब 30 हजार मकानों पर जारी नोटिसों से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। बताया गया है कि वर्ष 2010 से अब तक सीएचबी अपनी जरूरत आधारित नीति में पांच बार संशोधन कर चुका है। अब एक बार फिर नई कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे कानूनी अड़चनों के साथ-साथ आम लोगों की समस्याओं का समाधान निकल सके।
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