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अमृतसर रेल हादसा: CCTV का नया वीडियो आया सामने, नवजोत कौर सिद्धू के जाने को लेकर हुआ खुलासा

Mon, 22 Oct 2018 01:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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सीसीटीवी फुटेज
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अमृतसर रेल हादसे को लेकर पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर पर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने उन पर हादसे के वक्त भागने के आरोप लगाए थे। हालांकि नवजोत कौर का कहना है कि उनको घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

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जैसे ही घटना की जानकारी हुई तो कमिश्नर से बात भी की और वो घटना से पहले ही कार्यक्रमस्थल से जा चुकी थीं। हालांकि इस दौरान उस दिन का एक नया सीसीटीवी फुटेज समाने आया है। नए वीडियो के बाद नवजोत कौर पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

यह वीडियो घटनास्थल के पास राज कुमार के घर पर लगे सीसीटीवी का है। फुटेज में नवजोत कौर के आने के समय, देरी और कब वहां से निकली सब साफ तौर पर स्पष्ट हो रहा है। यही वीडियो घटना वाले दिन यानि 19 अक्टूबर की शाम का है।
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अमृतसर के जौड़ा फाटक के पास स्थित धोबीघाट इलाके के एक मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम था। कार्यक्रम स्थल रेलवे लाइन के करीब था। वीडियो के अनुसार नवजोत कौर शाम 6 बजकर 40 मिनट के करीब स्टेज पर पहुंचती हैं।

उनके पहुंचने के 14 मिनट बाद ही रावण का दहन होता है। उस वक्त समय था 6 बजकर 54 मिनट। पुतला दहन के वक्त तक नवजोत कौर मंच पर थीं।  इसके 30 सेकेंड बाद ही दर्दनाक हादसा हो गया। हालांकि हादसा इस कैमरे में कैद नहीं हो पाया। 

रावण दहन के करीब 58 सेकेंड बाद नवजोत कौर मंच से उतरकर चली गईं। हालांकि उनके जाने तक किसी को भी शायद हादसे के बारे में जानकारी नहीं थी उस वक्त समय था 6 बजकर 55 मिनट। सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर के जाने के एक मिनट बाद ही कोहराम मच जाता है। वहां पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी शुरू होती है और पुलिसकर्मी रेलवे लाइन की तरफ जाते हुए दिख रहे हैं। 

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बचाव में उतरे सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू
जौड़ा फाटक रेल हादसे के बाद पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पहली बार एक चैनल पर आकर सफाई दी है। उन्होंने अपनी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू का बचाव करते हुए रेलवे के कंधों पर सारी जिम्मेदारी डाल दी है। सिद्धू ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने रावण दहन के लिए परमिशन दी थी, लेकिन परमिशन ग्राउंड के अंदर रावण दहन किया गया। जिस जगह हादसा हुआ है, वह कार्यक्षेत्र रेलवे के दायरे में आता है, जीआरपी से लेकर आरपीएफ तक सब रेलवे के अधीन है, ऐसे में वहां जुटी भीड़ को क्यों नहीं हटाया गया।

 उनकी पत्नी वहां चीफ गेस्ट थी, उनको एक नहीं 6 कार्यक्रमों में जाना था। दशहरे के दिन यह उनका शायद पांचवां कार्यक्रम था, जहां से वह निकले, रास्ते में उन्हें यह सूचना मिली कि यहां हादसा हो गया है तो तुरंत पुलिस कमिश्नर को फोन किया और अस्पताल में पहुंचकर घायलों के इलाज में लग गईं। इस दौरान वह साउथ में थे।

 वह 7:30 बजे बेंगलुरू पहुंचे तो पता चला कि जौड़ा फाटक पर हादसा हो गया है। जिसके बाद वह यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल राजनीति करने में जुटे हैं। लेकिन वह लाशों पर राजनीति नहीं करते। इसलिए अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि बाहिबल कलां कांड में सुखबीर बादल ने क्यों नहीं लोगों के घर जाकर हाल-चाल पूछे। 

सिद्धू ने उठाए सवाल
नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि रेलवे की टॉप ट्रेन लोगों को कुचलकर गुजरती हुई निकली। हेड लाइट क्यों नहीं थी। हेडलाइट होती तो 3 किलोमीटर पहले ही लोगों को पता चल जाता कि सामने से ट्रेन आ रही है। एक गाय भी ट्रेन से कट जाती है तो ट्रेन को रोका जाता है। जो ट्रेन 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है वह 110 किलोमीटर की रफ्तार से क्यों निकली।

 सिद्धू ने कहा कि फाटक पर गेटमैन होता है, 300 मीटर दूर तैनात खड़े गेटमैन की कोई जिम्मेदारी नहीं। ट्रेन चालक की कोई जिम्मेदारी नहीं। रेलवे की पुलिस है, रेलवे की प्रोटक्शन फोर्स है, वह क्या कर रही थी। दशहरा की स्टेज से भी कई बार लोगों को चेतावनी दी गई कि पटरी को खाली करवा दें। लेकिन रेलवे प्रशासन नहीं जागा।
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