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40 साल पहले भी निरंकारियों से टकराव के बाद ही पंजाब में फैला था उग्रवाद, तो पुरानी है दुश्मनी

Mon, 19 Nov 2018 02:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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सिख दंगों की त्रासदी
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कट्टरपंथियों की निरंकारियों के साथ पुरानी दुश्मनी है, 40 साल पहले पंजाब में आतंकवाद की शुरुआत निरंकारी और चरमपंथियों के बीच टकराव से ही हुई थी। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के सहयोग से बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के रंजीत सिंह नीटा, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के लखबीर सिंह रोडे पंजाब में आतंकवाद को फैलाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
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पंजाब में पहले डेरा प्रमुखों को उड़ाने की कोशिश की गई, जिसमें डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम पर हरियाणा में आरडीएक्स से हमला हुआ। डेरा नूरमहल के आशुतोष महाराज को भी आतंकवादियों ने मारने को कई बार पाक से आरडीएक्स मंगवाया लेकिन सफल नहीं हो पाए। पिछले दो सालों में पंजाब में हिंदू नेताओं की हत्या की गई, 17 हिंदू नेताओं को पंजाब में आतंकवादियों ने मारा।

हिंदू संघर्ष सेना के विपिन शर्मा की अमृतसर में गोली मार कर हत्या की गई, इसके बाद आरएसएस नेता रविंदर गोसाईं, श्री हिंदू तख्त के जिला अध्यक्ष की लुधियाना में हत्या, आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा की जालंधर में हत्या, शिव सेना नेता दुर्गा प्रसाद गुप्ता की खन्ना में हत्या की गई लेकिन आतंकवाद खड़ा नहीं हो पाया।
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कट्टरपंथियों की निरंकारियों के साथ पुरानी दुश्मनी

सिख दंगों की त्रासदी
दरअसल, 1980 के दशक में अशांति फैलाने वाले कट्टरपंथियों की निरंकारियों के साथ पुरानी दुश्मनी है। 1978 में बैसाखी वाले दिन दोनों पक्षों में खूनी टकराव भी हो चुका है। उस समय पंजाब सरकार ने निरंकारियों को अमृतसर में धार्मिक समारोह करने की इजाजत दी थी। इसका विरोध करने आए दमदमी टकसाल और अन्य सिख संगठनों का उनके साथ टकराव हो गया था।

इस दौरान चली गोली में 13 लोगों की मौत हो गई थी। कट्टरपंथी सिखों की हत्या के लिए निरंकारियों को जिम्मेदार मानते थे और जवाब में सिख  कट्टरपंथियों ने निरंकारियों के प्रमुख गुरबचन सिंह को दिल्ली में गोली मार दी थी। गुरबचन सिंह के कत्ल के आरोप में रणजीत सिंह को 13 साल जेल में भी बिताने पड़े थे। बाद में रणजीत सिंह को रिहा कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार का पद संभाला।
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