पूछताछ में सामने आया था कि उसका इरादा भी दिवाली पर ग्रेनेड से दहशत फैलाना था। उसके बाद अब अमृतसर में निरंकारी सत्संग भवन में जबरन दाखिल होकर दो आतंकियों ने हैंड ग्रेनेड फेंका। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 19 घायल हो गए। पंजाब में यह लगातार तीसरी घटना है, जिसमें हैंड ग्रेनेड ही दहशतगर्दी का हथियार बना है।
आतंक के इस नए चेहरे ने पंजाब की सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। क्योंकि हैंड ग्रेनेड से बहुत आसानी से हमला किया जा सकता है। पहले आतंकी आरडीएक्स का प्रयोग करते थे, जिसमें काफी दिक्कतें हैं। लेकिन हैंड ग्रेनेड को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बहुत आसान है। कश्मीर पैटर्न पर अगर आतंकी पंजाब में भी इसका प्रयोग करने लगे, तो उनसे निपटना बहुत मुश्किल होगा।
मकसूदां थाने पर हमले की तफ्तीश में सुरक्षा एजेंसियों को पता चला था कि कश्मीर से काफी ग्रेनेड पंजाब आ चुके हैं। यह भी उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अमृतसर में हुए ग्रेनेड हमले से एक बार फिर साफ हो गया है कि पंजाब में अस्थिरता फैलाने के लिए होने वाली वारदातों के पीछे मास्टरमाइंड आईएसआई ही है। पटियाला में गिरफ्तार शबनमदीप सिंह से पूछताछ में पता चला था कि वह पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस अफसर के संपर्क में था। वह कट्टरपंथियों के संगठन सिख फॉर जस्टिस के दो लोगों के भी संपर्क में था। जिन्होंने उसे रेफरेंडम 20-20 का प्रचार करने को कहा था।
इस संगठन को भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थन देती है। वहीं, मकसूदां थाने पर हमले में कश्मीर के कट्टरपंथियों का हाथ सामने आया। कश्मीर के कट्टरपंथियों को भी आईएसआई का ही समर्थन हासिल है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा कि अमृतसर के हमले में आईएसआई समर्थित खालिस्तानियों या कश्मीर के कट्टरपंथियों के शामिल होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पंजाब में हुई घटनाओं से साबित होता है कि सूबे को अस्थिर करने की पाक की नापाक हरकतें जारी हैं।