राजासांसी रोड पर गावं अदलीवाल लिंक रोड पर स्थित निरंकारी भवन में हुए हमले में घायल हरजोत सिंह ने बताया कि जब आतंकी भवन में घुसे, तब वह सत्संग कर रहा था। जैसे ही बम गिरा, उसने पीछे मुड़कर देखा। एक आतंकी उससे कुछ ही दूरी पर खड़ा था। लगा, उसने गुरु पर कोई पथर फेंका है। मैं उसे पकड़ने के लिए उठा कि धमाका हो गया। हरजोत सिंह का इलाज गुरुनानक देव अस्पताल में चल रहा है।
धमाके के बाद उसने देखा कि उसके पिता कुलदीप सिंह जख्मी हो गए हैं। उसके भाई आशु की टांगों से खून बह रहा था। मां और बहन सुरक्षित थीं। राजवंत कौर ने कहा कि उसे लगा कि किसी ने कोई बड़ा पत्थर मंच पर फेंका है। मैं सत्संग में पहली कतार में बैठी थी। पहले ऐसा लगा कि मुझे करंट लग रहा है। आसपास नजर गई तो कई श्रद्धालु खून से लथपथ दिखे। संगत बाहर दौड़ रही थी।
थोड़ी देर बाद एहसास हुआ कि मेरी टांगों से खून रिस रहा है। चेहरे पर हाथ लगाया तो लगा कि खून निकल रहा है। निर्मल कौर ने बताया कि धमाके की आवाज सुनकर उसका तो दिमाग ही सुन्न हो गया था। वह छेहरटा से सत्संग सुनने के लिए हर हफ्ते यहां आती हैं। राजप्रीत कौर के अनुसार उसका बेटा इस आतंकी हमले में बाल-बाल बच गया। वह सत्संग के बीच में ही उठ कर चला गया था। वह भी पहली पंक्ति में बैठा था।
भवन के बाहर खड़े सेवादार श्रद्धालुओं को भवन के भीतर जाने के लिए रास्ता बता रहे थे। एक घंटे के सत्संग के बाद दो नौजवान मोटर साइकिल से भवन के बाहर पहुंचे। सेवादारों ने हाथ जोड़कर उनका अभिनंदन किया। गर्म लोइयां लपेटे दोनों नौजवानों को मोटर साइकिल एक तरफ पार्किंग करने के लिए कहा गया। दोनों ने अपना मुंह लोई से ढका था।
अचानक एक युवक मोटर साइकिल से उतरा और उसने सेवादार की कमर पर पिस्तौल लगाकर उसे चुप रहने की धमकी दी। दूसरा आतंकी मोटर साइकिल से तेजी से नीचे उतरा और सत्संग भवन की तरफ दौड़ा। अंदर जाकर मंच पर सत्संग कर रहे देशा सिंह के पास खड़ा हो गया। इसके बाद उसने अपनी लोई में छिपाए हैंड ग्रेनेड की पिन निकाली और मंच पर ग्रेनेड फेंककर भाग गया।
बाहर सेवादारों पर पिस्तौल ताने खड़ा आतंकी धमाके के आवाज के साथ चौकन्ना हो गया। जैसे ही अंदर से आतंकी बाहर आया और दोनों बाइक पर बैठकर गांव अदलीवाल की तरफ भाग गए।