एसजीपीसी ने श्री अकाल तख्त साहिब के चार प्यारों को बर्खास्त कर दिया। अंतरिम समिति की कार्यकारिणी बैठक में यह फैसला लिया गया। पांचवें प्यारे 31 दिसंबर को सेवामुक्त हो चुके हैं।
पांच तख्तों के जत्थेदारों द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दी माफी से पंज प्यारे नाराज चल रहे थे। इसके बाद उन्होंने एसजीपीसी को जत्थेदारों को उनके पद से हटाने का निर्देश दिया था।
एसजीपीसी की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण पंज प्यारों ने दोबारा आदेश जारी किए थे कि अगर एक जनवरी तक एसजीपीसी पांचों जत्थेदारों को उनके पद से नहीं हटाती तो वह दो जनवरी को कौम के नाम नया आदेश जारी कर देंगे। इससे पहले ही एक जनवरी को एसजीपीसी की अंतरिम कमेटी की बैठक करके पंज प्यारों को बर्खास्त करने का फैसला ले लिया गया।
कमेटी की बैठक एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ की अध्यक्षता में हुई। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके श्री अकाल तख्त साहिब के प्यारे सतनाम सिंह, सतनाम सिंह पुत्र हरभजन सिंह, भाई मंगल सिंह और भाई त्रिलोक सिंह ने उनके पदों से बर्खास्त कर दिया गया। जबकि मेजर सिंह 31 दिसंबर को सेवामुक्त हो चुके हैं।
मक्कड़ ने पंज प्यारों के कामों की निंदा की
बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत में मक्कड़ ने कहा कि पंज प्यारों को जो ड्यूटी दी गई थी, उन्होंने उसके बजाय अन्य कामों की ओर ध्यान दिया और अपनी ड्यूटी को सही ढंग से नहीं निभाया।
पंज प्यारों का काम धर्म प्रचार करना और अमृतपान करवाना है। ये सभी एसजीपीसी के कर्मचारी हैं और उनके ऊपर भी सर्विस नियम लागू होते हैं। प्यारों ने नियमों के खिलाफ जाकर मनमर्जी की।
उन्होंने कहा कि पंज प्यारों ने कुछ समय से अपने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर काम किए हैं और ऐसा करके सिख कौम के अंदर अनियमितताएं पैदा कर दी हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार पंज प्यारों ने श्री अकाल तख्त साहिब के खिलाफ निर्देश दिए हैं। यह साजिश का हिस्सा है।
पंज प्यारों ने महान संस्था के वकार को धक्का पहुंचाया है। अकाल तख्त साहिब और अन्य तख्त साहिबों पर सुशोभित जत्थेदारों के खिलाफ पंज प्यारों को गुरमता देने का अधिकार नहीं है। इसलिए इन प्यारों के खिलाफ कार्रवाई करनी जरूरी थी ताकि श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा हमेशा बनी रहे।
पंज प्यारे अपने फैसले पर अडिग
एसजीपीसी ने चाहे उनको पदों से हटा दिया है लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं। सारी कौम जानती है कि एसजीपीसी क्या कर रही है। एसजीपीसी अपने फैसलों को जत्थेदारों के माध्यम से जारी करवाती है।
एसजीपीसी को आदेश दिए गए थे कि पांचों जत्थेदारों को पदों से हटाया जाए लेकिन एसजीपीसी ने इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। जब उन्होंने अपना पहला गुरमता जारी किया था, तब वह अपने पदों पर थे। अब भी हैं।
एसजीपीसी एक साजिश के तहत उनको पदों से हटा रही है। कौम पंज प्यारों को स्वीकार करती है। इसलिए वह दो जनवरी को अपना अगला आदेश जरूर जारी करेंगे।