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विरोधियों को धूल चटाने को तैयार मां-बेटी, खेलेंगी वर्ल्ड चैंपियनशिप

Wed, 27 Jul 2016 11:19 PM IST
जतिन जैन/अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
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Himanshi-Amita Marwah or Coach Karamveer - फोटो : amar ujala
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अब मार्शल आर्ट के मंच पर मां और बेटी अपनी किक और पंच से विरोधियों के हौसले पस्त करेंगी। जी हां, यह एक संयोग है कि मां अमिता मरवाहा और बेटी हिमांशी का चयन कोरिया में होने वाली वर्ल्ड यूथ ताइक्वांडो चैंपियनशिप के लिए किया गया है। मां अमिता का चयन सीनियर कैटेगरी में किया गया है और बेटी हिमांशी का चयन अंडर-17 आयु वर्ग कैटेगरी में।
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वर्ल्ड यूथ ताईक्वांडो चैंपियनशिप 1 से दस अगस्त तक होगी। पंचकूला सेक्टर-4 की रहने वाली अमिता मरवाहा ने बताया कि उन्होंने स्कूल के समय से ठान लिया था कि वह मार्शल आर्ट में अपनी एक खास पहचान बनाएंगी। यही कारण है कि वह काफी समय से ताइक्वांडो के अभ्यास में लगी रहीं। यूं तो अमिता प्रोफेशन से एक साइको थेरेपिस्ट हैं। स्कूल  टाइम में भी कुछ समय के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की। उसी समय अमिता ने देखा कि उसके कई साथी आर्थिक तंगी के कारण ट्रेनिंग नहीं कर सके। अमिता ने बताया कि उसी समय निश्चत किया कि आने वाले दिनों में वह गरीब बच्चों  के लिए एक संस्था चलाएंगी। इसमें वह उनको मार्शल आर्ट की फ्री ट्रेनिंग देंगी। 

इसी  सोच के साथ दोनों बेटियों को 16 साल की हिंमाशी और 9 साल की ईशानी को रोजाना मार्शल आर्ट की क्लास के लिए छोड़ने और लेने जाती थी। कुछ साल पहले अचानक उसके भी मन में बच्चों के साथ मार्शल आर्ट सीखने की इच्छा जागी।  सीखना शुरू किया और पिछले कुछ सालों में मारवाह ने मार्शल आर्ट के स्टेट से लेकर नेशनल लेवल तक करीब 30 मेडल हासिल किए हैं। उनकी बड़ी बेटी हिमांशी ने अब  तक नेशनल स्टेट लेवल मार्शल आर्ट टूर्नामेंट में 19 मेडल जीतें हैं। छोटी  बेटी ईशानी ने 12 मेडल जीते हैं। अमिता ने बताया कि पिछले महीने  ताईक्वांडो बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से इंटरनेशनल चैंपियनशिप में खिलाड़ियों  के चयन के लिए मीटिंग हुई थी। अमिता और उनकी बेटी का चयन प्रतियोगिता में रिकॉर्ड के आधार पर किया गया। अमिता एक अगस्त को कोरिया जाएंगी। 
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Amita Marwah - फोटो : amar ujala
मारवाह 300 बच्चों को दे रही फ्री ट्रेनिंग
अमिता ने बताया कि वह गरीब बच्चों के लिए एक सोसायटी चलाती हैं। इसमें बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जाती है। अमिता ने बताया कि उनकी सोसायटी के साथ पंचकूला,  चंडीगढ़ के करीब 300 गरीब बच्चे जुड़े हैं, जिन्हें वह मार्शल आर्ट की  ट्रेनिंग देती है। इसकी शुरूआत गरीब बच्चों के समर कैंप से की थी और अब वह  रोजाना बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती है।

मरवाहा के कोच कोरिया प्रतियोगिता के लिए कर रहे ट्रेंड 
मारवाह के कोच करमवीर अहलावत ने बताया कि उन्होने 2001 से मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग शुरू की, इसके बाद किसी मजबूरी के कारण 2005 में मार्शल आर्ट को छोड़ना पड़ा। फिर 2007 में उन्होने बॉडीबिल्डिंग शुरू की, जिसमें उन्होने मिस्टर पंचकूला और चंडीगढ़ के अलावा 2015 में मिस्टर हरियाणा का खिताब हासिल किया है। अब करमवीर 2017 में होने वाली आईबीबीएफ इंडिया के लिए खेलने की तैयारी में जुटे हुए है। अब पंचकूला से कोरिया में मार्शल आर्ट प्रतियोगिता के लिए जा रहे अमिता मारवाह और बेटी हिमांशी को ट्रेनिंग दे रहे है।

डेढ़ वर्ष पहले खेलने के लिए किया जागरूक
मारवाह ने दो साल पहले सर्जरी की वजह से मार्शल आर्ट खेलने की चाह छोड़ दी थी। इसके बाद कोच करमवीर ने अमिता मारवाह को मार्शल आर्ट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। जिसके बाद छह महीने का रेस्ट कर मारवाह ने मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस शुरू कर दी। जिसके बाद से अभी तक  उन्होने मार्शल आर्ट की प्रतियोगिताओं में चार गोल्ड मेडल हासिल कर लिए है। अब वह कोरिया जाकर भारत देश के लिए खेलेंगी। कोरिया में होने वाली इस प्रतियोगिता में 25 देशों की टीम हिस्सा ले रही है।
 
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