अमेरिकी महिला से दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। इस दौरान पीड़ित महिला के सामने आरोपी की शिनाख्त परेड कराई गई, लेकिन पीड़ित अमेरिकी महिला आरोपी को पहचानने में नाकाम रही। वह यह नहीं बता पाई कि उससे दुष्कर्म करने वाला आरोपी वही है या कोई और है।
इससे असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि अदालत ने इस मामले की सुनवाई फिलहाल तीन जुलाई तक के लिए टाल दी है। यह मामला अप्रैल 2015 का है। 24 वर्षीय एक अमेरिकी महिला ने ई-मेल के जरिए आईजी को सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
पीड़िता के मुताबिक, वह भारत घूमने आई थी। इस दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने के बाद वह चंडीगढ़ घूमना चाहती थी। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद उसे फ्रांस जाना था। उसकी यात्रा की अवधि खत्म होने में भी सिर्फ चार दिन ही बचे थे। 17 अप्रैल 2015 की रात को होटल जाने के लिए उसने सेक्टर-17 के बस स्टैंड से ऑटो लिया। ऑटो चालक बलदेव कुमार होटल में कमरा नहीं मिलने पर उसे अपने घर ले गया।
महिला के आरोप के मुताबिक, घर पर बलदेव का एक साथी पहले से मौजूद था। जहां दोनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया। उसके बाद पीड़िता फ्रांस पहुंची और वहां से ई-मेल के जरिए पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
करीब दो साल बाद आरोपी बलदेव कुमार को लुधियाना से पकड़ लिया जबकि दूसरे आरोपी को नहीं पकड़ा जा सका। उसके बाद बयान और आरोपी की शिनाख्त परेड (टीआईपी) को लेकर पेच फंस गया, लेकिन पीड़िता के अमेरिका वापस जाने के कारण उसके बयान नहीं हो सके, जिससे कार्यवाही रुकी हुई थी।
ट्रायल कोर्ट ने यूटी पुलिस को पीड़िता के बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग से करवाने की अनुमति यूटी पुलिस को दे दी थी, हालांकि इसमें एंबेसी को शामिल करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन यहीं से समस्या पैदा हुई कि कैसे एंबेसी को शामिल किया जाए। इस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए मजिस्ट्रेट ने हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि बयान दूतावासों के माध्यम से ही दर्ज करवाए जाएंगे। उसके बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए।