अभी तक वन, टाउन व कंट्री प्लानिंग आदि विभाग रोजमर्रा में जमीन संबंधित अनेक अधिसूचनाएं सरकारी गजट व अखबारों के माध्यम से जारी करते आ रहे थे। लेकिन राजस्व रिकार्ड में प्रति किला व खसरा नंबर के हिसाब से नए बदलाव की एंट्री नहीं की जा रही थी। जिससे राज्य में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा था।
अतिक्रमण व गैर वन कार्यों के अनियंत्रण से शिवालिक व अरावली पहाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वन व टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग की अधिसूचनाओं की राजस्व रिकार्ड में एंट्री मार्क न होने के कारण न्यायालय के आदेशों पर भवनों को तोड़ने तक की नौबत आ रही है। अरावली में अवैध निर्माण व अतिक्रमण किसी से छिपा नहीं है।
अधिकारियों की तय हुईं जिम्मेदारियां
- जमीनों के इंतकाल, गिरदावरी, कब्जों इत्यादि से जुड़े हर निर्णय को पटवारी 100 फीसदी वेब हेलरिस पर अपलोड करेंगे।
- फील्ड कानूनगो पखवाड़े में एक बार पटवारी के दर्ज रिकॉर्ड को जांचेंगे
- सर्कल राजस्व अधिकारी नई एंट्री के 25 प्रतिशत रिकॉर्ड की कम से कम जांच करेंगे
- एसडीओ सिविल नई एंट्री में से 5 फीसदी व जिला राजस्व अधिकारी 2 फीसदी रिकॉर्ड को जांचेंगे।
लापरवाही पर आपराधिक मामला होगा दर्ज
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना में साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लगातार लापरवाही बरतने पर कानून अनुसार आपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाएगा।