सेक्टर-35 निवासी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद जीएमएसएच-16 की एंबुलेंस उन्हें लेने उनके घर पहुंची । सुबह 11 से 12:15 बजे तक एंबुलेंस वाले को वहां इंतजार करना पड़ा। कारण, रमेश कुमार जिस दंत मंजन का प्रयोग करते थे, उसे खरीदने के लिए उनका बेटा बाजार गया था।
दंत मंजन आसानी से न मिलने के कारण लगभग एक घंटे तक वह यहां-वहां तलाशता रहा। इतनी देर में एंबुलेंस चालक कई बार मरीज को भेजने का अनुरोध कर चुका था। लेकिन हर बार उसे कोई न कोई बहाना करके थोड़ी देर और रुकने के लिए कह दिया जा रहा था। एक घंटे बाद जब रमेश का बेटा दंत मंजन लेकर लौटा तब रमेश बाकी सामान पैक करके एंबुलेंस में बैठे।
एंबुलेंस में जाते पड़ोसी न देख लें, इसी जुगत में लगा दिए 45 मिनट
मलोया निवासी जगदीश ( बदला हुआ नाम) की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद जीएमएसएच-16 से उनके पास कॉल आई कि कुछ समय में उन्हें लेने के लिए एंबुलेंस उनके घर आएगी। यह सुनते ही जगदीश परेशान हो गए। उन्हें इस बात की चिंता सता रही थी कि कहीं एंबुलेंस में बैठते हुए उनके पड़ोसियों ने उन्हें देख लिया तो वे क्या सोचेंगे।
इसी उधेड़बुन में अपने घर से बाहर निकल कर एंबुलेंस में बैठने में उन्होंने 45 मिनट गुजार दिए। इस दौरान एंबुलेंस चालक ने उन्हें कई बार चलने के लिए कहा लेकिन जगदीश हर बार कुछ न कुछ बहाना बनाकर टाल दे रहे थे। यहां भी चंद मिनट में होने वाले काम के लिए 45 मिनट का समय लगाया गया।
जीएमएसएच-16 के कोविड-19 के ट्रांसपोर्ट के नोडल डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि हर मरीज को घर से अस्पताल छोड़ने के बाद एंबुलेंस को पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाता है। इस दौरान उसकी धुलाई होने के साथ ही उसे संक्रमणमुक्त करने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। ऐसी स्थिति में मरीज द्वारा किया गया विलंब एम्बुलेंस के शेड्यूल को गड़बड़ कर दे रहा है। जिस एंबुलेंस को 5 मरीजों को घर से अस्पताल पहुंचाना होता है वह दो से तीन मरीजों को ही ला पा रही है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि लोग जागरूक बनें और समय बर्बाद न करें।
31 एम्बुलेंस 4 जोन
कोरोना मरीजों के लिए जीएमएसएच-16 के अंतर्गत 31 एंबुलेंस का संचालन 24 घंटे किया जा रहा है। इसमें शहर को 4 जोन में बांटकर क्रमश: सेक्टर-16, 22, 45 और मनीमाजरा में मरीजों को सुविधा दी जा रही है। एंबुलेंस में कोरोना संक्रमण से बचाव के मानकों का प्रयोग करते हुए सारी व्यवस्था की गई है जिससे संक्रमित मरीज से एम्बुलेंस के चालक और अन्य स्टाफ में संक्रमण का खतरा न रहे।
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