विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद पठानकोट में अजीब हालात बन चुके हैं। पठानकोट नगर निगम में कांग्रेस काबिज है, भाजपाई विधायक चुने गए और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है। परिणाम के बाद सभी दलों को काम करना चुनौतीपूर्ण होगा। वहीं, शहर के लोग भी पशोपेश में हैं। विकास को लेकर तीनों पार्टियों में कितना सामंजस्य बैठता है, यह वक्त बताएगा लेकिन, इसके फायदे और नुकसान का सीधा असर शहर के विकास और जनता पर पड़ेगा। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी सकते में हैं। कर्मचारी वर्ग के लिए भी आने वाले दिन चुनौतियों से भरे हो सकते हैं।
बता दें, इससे पहले 2017 में जब कांग्रेस के अमित विज विधायक बने तो नगर निगम में भाजपा काबिज थी। पूरे 4 साल दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए। भाजपा के तत्कालीन मेयर अनिल वासुदेवा और कांग्रेस विधायक अमित विज आमने-सामने रहे। कई बार टकराव हुआ।
तत्कालीन विधायक विज कहते रहे कि भाजपा के मेयर और पार्षद विकास कार्यों में रोड़े अटकाते हैं तो तत्कालीन मेयर वासुदेवा कई बार कह चुके हैं कि अमित विज विकास कार्य नहीं करने देते। यह हालात तब थे जब भाजपा और कांग्रेस ही मैदान में थी। इस बार सत्ता ‘आप’ के हाथ है। उनके हलका इंचार्ज और अन्य नेताओं के हस्तक्षेप के बाद परिस्थितियां और भी गंभीर हो सकती हैं।
भोआ हलका में भी ऐसे ही होंगे हालात
पठानकोट नगर निगम के अलावा नगर पंचायत नरोट जैमल सिंह पर भी कांग्रेस काबिज है। कांग्रेस की दीक्षा ठाकुर अध्यक्ष हैं, अब हलका भोआ से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार लाल चंद कटारूचक्क जीते हैं तो टकराव तय है। इसी तरह, नगर काउंसिल सुजानपुर में भी कांग्रेस का कब्जा है। विधायक भी कांग्रेस के नरेश पुरी चुने गए। लेकिन, ‘आप’ की सरकार बनने के बाद हलका इंचार्ज अमित मंटू के हस्तक्षेप के बाद टकराव की स्थिति बन सकती है।