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अदभुत: रोहतक के पीजीआई में जन्मा दो सिर वाला बच्चा

Thu, 21 May 2015 08:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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रोहतक के पीजीआई में उस समय सनसनी फैल गई, जब सिरसा से आई एक महिला ने दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया। सर्जरी से पैदा हुए बच्चे को डॉक्टरों ने करीब दो घंटे उपचार दिया, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका। नवजात का शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया है।
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सिरसा के गांव रोड़ी से आई ममता पत्नी बलबीर ने बुधवार सुबह करीब 11 बजे एक दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया। नवजात को देखकर मौके पर डॉक्टर, स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारी भौचक्के रह गए। डॉक्टरों ने बच्चे की नाजुक हालत देखते हुए उपचार के लिए उसे अपने पास रखा।

करीब दो घंटे उपचार के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जच्चा की मां जसविंद्र कौर व परिजन बाब सिंह ने बताया कि ममता का पहला बेटा डेढ़ साल का है। वह भी ऑपरेशन से हुआ था। जच्चा ने बताया कि उसने दो बार निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र में अपने बच्चे की जांच कराई थी और सिरसा के सरकारी अस्पताल में भी दिखाया था।
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इसके बाद भी उन्हें बच्चे के बारे में नहीं बताया गया। वहीं वार्ड की स्टाफ नर्सों ने बताया कि महिला को बच्चे की पहले से जानकारी थी, हमने भी उसे बता दिया था। परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है।
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नहीं पहुंची एंबुलेंस, आटो में जन्मा बच्चा

समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर बुधवार को एक महिला ने चलती आटो में बच्चे को जन्म दे दिया। मामला सोनीपत का है। हालांकि जच्चा-बच्चा के साथ किसी तरह की कोई अनहोनी तो नहीं हुई, लेकिन संस्थागत डिलीवरी को लेकर 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा का दावा करने वाली स्वास्थ्य विभाग की पोल जरूर खुल गई। फिलहाल सामान्य अस्पताल में भर्ती जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और उन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है।

सोनीपत के गांव खेवड़ा की रहने वाली गुड़िया (25) ने बुधवार दोपहर अचानक प्रसव पीड़ा की शिकायत की। हालत बिगड़ते देख परिजनों ने इसकी सूचना आशा वर्कर सीमा तक पहुंचाई। सूचना पाते ही सीमा पीड़ित महिला का हाल जानने उसके घर पहुंच गई।

प्रसूता की हालत देख आशा ने तुरंत ही कंट्रोल रूम स्थित 102 नंबर पर कॉल कर एंबुलेंस भेजने को कहा, लेकिन कंट्रोल रूम ने एंबुलेंस की तुरंत सुविधा उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी। एंबुलेंस की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम ने लगभग एक घंटे तक इंतजार करने को कहा।

इस बीच गुड़िया की हालत और बिगड़ गई। आननफानन में पीड़ित महिला का पति सुरेंद्र और सास ने किराया का आटो मंगवाया और सामान्य अस्पताल के लिए चल दिए। पीड़िता के साथ खुद आशा वर्कर भी थी। इस बीच दर्द से कराह रही पीड़ित महिला की हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी थी।

लगभग 20 मिनट बाद जैसे ही आटो सामान्य अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास पहुंचा तो महिला को प्रसव हो गया। महिला ने बेटे को जन्म दिया।
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सीएम बादल के गृहक्षेत्र की महिला ने जीप में जन्मी बेटी

उध्‍ार डबवाली (सिरसा) में पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल के गृह क्षेत्र लंबी में स्वास्थ्य सुविधाएं न होने की वजह से डबवाली लाई जा रही एक महिला ने जीप में ही बेटी को जन्म दे दिया।

सीएम हलके के बाशिंदे इसके लिए भगवान का शुक्रिया करते हुए बादल को कोस रहे हैं। यह पहला मामला नहीं जब सीएम हलके की महिला डिलीवरी के लिए डबवाली के सरकारी अस्पताल में लाई गई हो। आंकड़े बताते हैं कि प्रतिमाह डबवाली के सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं में पच्चीस से तीस फीसदी सीएम बादल के गृह क्षेत्र से होती हैं।

पंजाब के गांव मिठड़ी बुधगिर के रहने वाले कमलदीप सिंह की पत्नी सुखमनदीप को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। आस-पास के क्षेत्र में वाहन सुविधा उपलब्ध न होने के चलते कमलदीप डबवाली पहुंचा। किराए पर जीप करके वह अपने गांव ले गया और प्रसव पीड़ा झेल रही अपनी पत्नी को लेकर डबवाली की ओर चल दिया।

बीच मार्ग में ही सुखमनदीप कौर ने बेटी को जन्म दिया। उसके साथ चल रही सास मनजीत कौर, बुआ मनजीत कौर तथा मां गुरप्रीत कौर ने उसे संभाला। जैसे-तैसे जीप चालक ने जच्चा-बच्चा को डबवाली के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया। अस्पताल के स्टॉफ ने दोनों को संभाला। मिठड़ी बुधगिर निवासी मनजीत कौर ने बताया कि बेशक वे सीएम बादल के हलके में रहते हैं लेकिन वहां स्वास्थ्य सुविधाएं शून्य हैं।

गांव लंबी तथा बादल में सरकारी अस्पताल बना हुआ है। लेकिन वहां स्टॉफ की कमी है। इसकी वजह से आज उन्हें डबवाली का रूख करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार गांव मिठड़ी बुधगिर से गांव बादल की दूरी महज आठ से दस किलोमीटर है। जबकि गांव लंबी की दूरी 18 से बीस किलोमीटर। डबवाली उनके गांव से करीब तेरह से पंद्रह किलोमीटर दूर है।
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