यदि आपको बिना मसाले और बेहतरीन स्वाद वाली कड़ी के साथ लच्छा परांठा खाना हो तो पूरे शहर में पंजाब यूनिवर्सिटी के बी ब्लॉक में स्थित ढाबे से बेहतरीन जगह और कहीं नहीं मिलेगी। सिर्फ पीयू के स्टूडेंट ही नहीं बल्कि दूर-दराज से लोग भी इस ढाबे के जबरदस्त फैन हैं। यहां की तंदूर में बने लच्छा परांठा, दाल, सब्जी कढ़ी और राजमा के स्वाद का हर कोई कायल है। सुबह दस बजे से ही तंदूर की खुशबू इलाके में पहुंचने लगती है।
बता दें कि मूलरूप से मोरिंडा के पास के गांव और वर्तमान में खरड़ निवासी महेंद्र सिंह पिछले 20 वर्षों से पीयू में ढाबा चला रहे हैं। यह ढाबा बच्चों और लोगों के बीच ‘अंकल का ढाबा’ के नाम से चर्चित हैं। महेंद्र सिंह के साथ कभी-कभी काम में हाथ बंटाने वाली उनकी पत्नी कमलजीत कौर ने बताया कि शुरुआत में जब उन्होंने ढाबा शुरू किया था तो पहले यहां सिर्फ लड़कियां आती थीं। उस समय यह ‘आंटी के ढाबे’ के नाम से चर्चित था। धीरे-धीरे यहां लड़के और टीचर भी आने लगे। सभी लोग उनके तंदूर पर बनाए लच्छा परांठे के साथ दाल, सब्जी कड़ी, राजमा का स्वाद बड़े चाव से लेते हैं।
आज राजनीति, गायकी और कलाकारी के क्षेत्र में काफी नाम कमा चुके पीयू के कई पूर्व स्टूडेंट भी यहां रोजाना खाना खाने आते थे। आज भी यहां पीयू के कई स्टूडेंट्स से लेकर प्रोफेसर, नॉन टीचिंग स्टाफ यहां तक कि पीजीआई के डॉक्टर भी खाना खाने आते हैं। कई यहां से पास होकर जा चुके स्टूडेंट्स आज भी यहां कभी-कभार चंडीगढ़ आने पर खाना खाने आते हैं। यहां आने वालों के अनुसार अंकल के खाने की खास बात यह है कि यह बिना मसालों का बना हुआ सादा खाना है और बहुत ही स्वादिष्ट होता है।
सरताज सिकंदर जमीन पर बैठ खाता थे खाना
कमलजीत कौर के अनुसार पंजाबी गायक सरताज सिकंदर जब पंजाब यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट थे, तो रोज उनके पास ही खाना खाने आते थे। अक्सर यहां भीड़ होने पर वो नीचे जमीन पर बैठ कर ही खाना खाने लग जाते थे। कमलजीत कौर के अनुसार उस समय सरताज यहां पढ़ने के साथ-साथ गायकी सीख रहे थे। उनके अनुसार उनके यहां और भी कई चर्चित लोग खाना खाने आते थे। हालांकि उन्हें उनके नाम तो याद नहीं पर अखबारों में फोटो देख उन्हें याद आता है कि वह लोग भी कभी उनके यहां खाना खाने आया करते थे।
पांच साल से पीयू में हूं। पहले हॉस्टल में था और अब बाहर किराए पर रहता हूं, लेकिन आज भी अक्सर खाना खाने यहीं आता हूं। अंकल के खाने की खासियत सादगी और साफ सुथरा खाना है। मेरा मानना है कि इससे सस्ता और बेहतर खाना पूरे चंडीगढ़ में कहीं नहीं है।
- संदीप सिंह, पीएचडी स्टूडेंट