शहर के नागरिकों को लोक सभा चुनाव में मतदान को मात्र ड्यूटी न समझ कर इसे एक फेस्टिव मूड के तौर पर लेना चाहिए। जैसे किसी त्योहार के प्रति उनका उत्साह होता है वैसे ही चुनाव में मतदान के लिए भी होना चाहिए। यह कहना है चंडीगढ़ के ज्वाइंट चीफ इलेक्टोरल अफसर और भूमि अधिग्रहण अधिकारी तिलक राज का।
जीसीजी-42 में बुधवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित सेमिनार ‘मतदान का महत्त्व’ में उन्होंने कहा कि चुनाव के दिन को लोगों को सिर्फ छुट्टी के तौर पर नहीं लेना चाहिए। इस दिन पिकनिक मनाने जाने की जगह देश में बेहतर गवर्नेंस लाने में योगदान देना चाहिए।
प्रशासन की कोशिश है कि इस बार चंडीगढ़ में शत प्रतिशत मतदान हो। तिलक राज ने कर्नाटक और राजस्थान विधान सभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां किस तरह से एक वोट ने उम्मीदवार को चुनाव जिताया था। इसलिए एक-एक वोट का बहुत महत्व है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन सभी छात्र-छात्राओं से यह संकल्प पत्र भी भरवाएगा किर वह खुद वोट डालने जाएंगे। उन्होंने उन छात्राओं से तुरंत वोट बनवाने का भी आह्वान किया, जिन्होंने अभी तक वोट नहीं बनवाई है।
युवाओं को प्रेरित करें
कालेज और यूनिवर्सिटी शिक्षकों को चाहिए कि वह युवाओं को वोट देने के लिए प्रेरित करें। सिर्फ वोटर बनना ही नहीं वोट डालना भी हर नागरिक की जिम्मेदारी है। वोट डालने से पहले चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के एजेंडे और उनके पूर्र्व कार्यकाल का भी बारीकी से अध्ययन करना चाहिए।
मतदान दिवस को सिर्फ पिकनिक के तौर पर न समझें। देश में आजादी से पहले सिर्फ 13 फीसदी मतदान होता था, लेकिन 1951-52 में इसका प्रतिशत 61.2फीसदी पहुंच गया।
इसके बाद मतदान का ग्राफ गिरा है। चंडीगढ़ जैसे शिक्षित शहर में रिकार्ड मतदान होना चाहिए। अमर उजाला के मतदाता को जागरूक करने के अभियान के शत प्रतिशत बेहतर रिजल्ट आएंगे।
प्रो.मोहम्मद खालिद (पूर्व पूटा प्रेसिडेंट और पीयू में इवनिंग विभाग में पालिटिकल साइंस विभाग के प्रोफेसर)
नेताओं से करें सीधा सवाल
इस बार देश के वोटरों में बड़ी संख्या युवाओं की है। मेरा मानना है कि चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों से शहर में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जाने चाहिए। नेताओं को छात्राएं फेसबुक के माध्यम से पूछें कि जीतने पर बेटियों की सुरक्षा के मामले को क्या वे अपने एजेंडे में शामिल करेंगे। अगर मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों की बात करें तो वहां के मुकाबले भारत में बेटियों को ऐसी सुरक्षा नहीं मिल पाती।
प्रमोद शर्मा (संयोजक युवसत्ता एनजीओ)
90 फीसदी छात्राओं का वोटर कार्ड बनवाया
कालेज की 90 फीसदी छात्राओं का वोटर कार्ड बनवाया गया है। एनएसएस और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को वोट के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है। हर साल इस मुद्दे पर कई सेमिनार भी किए जाते हैं। वोटिंग में छात्राओं की भागेदारी बहुत जरूरी है। अमर उजाला ने वोटर को जागरूक करने के लिए सराहनीय कदम उठाया है।
डा.नेमीचंद, असिस्टेंट प्रोफेसर जीसीजी-42
18 साल से अधिक उम्र के हर भारतीय को अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। पढ़े लिखे युवा अपनी समझ से बेहतर सरकार को चुन सकते हैं। जिससे देश का भविष्य बेहतर बन सकेगा। अन्य क्षेत्रों के साथ ही अब छात्राओं को भी अब वोट डालने में पहल कर खुद को आगे लाना होगा।
हरप्रीत कौर, प्रेसिडेंट, स्टूडेंट काउंसिल, जीसीजी-42
पहले युवा वोट का प्रयोग नहीं करते और फिर गलत सरकार चुने जाने की शिकायत करते हैं। सही जनप्रतिनिधि चुनने के लिए सभी युवाओं को अपना दायित्व निभाना होगा। अमर उजाला ने लड़कियों के कालेज में वोटर को जागरूक करने के लिए बेहतरीन अभियान चलाया है। मैं खुद इस बार अपनी सभी सहेलियों को वोट डालने के लिए प्रेरित करूंगी।
-सविता, वाइस प्रेसिडेंट, स्टूडेंट काउंसिल, जीसीजी-42
देश में बेहतर राजनैतिक माहौल बनाने में युवाओं की भागेदारी काफी अहम है। सभी युवाओं को आगामी लोकसभा चुनाव में बढ़ चढ़ कर वोटिंग करनी चाहिए।
-बलबीर कौर, छात्रा, बीए प्रथम वर्ष
चंडीगढ़ जैसे शहर में साक्षरता प्रतिशत 80 फीसदी से अधिक होने के बावजूद वोटिंग काफी कम होती है। अमर उजाला ने शहरवासियों को वोट डालने के लिए बेहतरीन जागरूकता अभियान शुरू किया है। सभी युवाओं को वोटिंग के लिए परिवार और अपने आसपास के लोगों को मोटिवेट करना चाहिए।
-चारु, छात्रा, बीए प्रथम वर्ष
शिक्षक और अभिभावक निभाएं अपनी भूमिका : प्रो.महाजन
हमें खुद पर गर्व होना चाहिए कि संविधान में हमें मतदान करने का अधिकार मिला है। देश में अभी तक सबसे ज्यादा मतदान 1984 में हुआ था जब 63 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले थे। उस समय देश के हालात कुछ और थे। मतदान क्यों कम होता है, इसे लेकर कई तरह के शोध हुए। लेकिन, मैं यह समझता हूं कि शिक्षक और अभिभावक अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा रहे हैं। घर में न तो मां-बाप अपने बच्चों को वोट डालने के लिए प्रेरित करते हैं और न ही क्लास में शिक्षक। अभिभावकों और शिक्षकों को इसमें अहम भूमिका निभानी चाहिए।
इस बार लोकसभा चुनाव एतिहासिक होने वाला है क्योंकि देश में 10 प्रतिशत (लगभग 2.3 करोड़) मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। ऐसे में जो युवा पहली बार वोट डालने जाएंगे उन्हें भी मतदान कर इस एतिहासिक चुनाव का हिस्सा बनना चाहिए। हमें स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस का अवकाश मनाने का कोई अधिकार नहीं है अगर हम वोट न डालें। वोट डालकर ही हम दिशा और दशा को तय कर सकते हैं और दुर्दशा से बच सकते हैं।
-प्रो.आरके महाजन, निदेशक, सेंटर फॉर आईएएस एंड अदर कंपीटीटिव एग्जाम, पंजाब यूनिवर्सिटी
छात्राओं को लगातार कर रहे हैं जागरूक : मनी बेदी
कालेज में छात्राओं को मतदान के बारे में जागरूक करने के लिए पहले भी अभियान चलाया गया है और अब नियमित तौर पर छात्राओं को मतदान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हमारी कोशिश रहेगी कि कालेज की जितनी भी छात्राओं की वोट हैं, वह सभी मतदान जरूर करें ताकि बाद में किसी को यह पछतावा न रह जाए कि उसने वोट नहीं डाला था। कालेज की जिन छात्राओं की वोट नहीं बन पाई है चुनाव से पहले उभनकी वोट भी बनाई जाएगी। चुनाव से पहले अमर उजाला ने जो यह अभियान चलाया है, वह सराहनीय है।
मनी बेदी, प्रिंसिपल, पीजी गवर्नमेंट कालेज फॉर गर्ल्स, सेक्टर-42, चंडीगढ़