अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शुरू किया गया 'शब्द सम्मान' को प्रख्यात साहित्यकारों की ओर से एक सराहनीय प्रयास बताया जा रहा है। उनका कहना है कि अमर उजाला हमेशा से ही साहित्य एवं साहित्यकारों के लिए खास लगाव रखता है। शब्द सम्मान से अमर उजाला की ओर से साहित्यकारों खासकर युवा लेखकों को यह सम्मान एक प्रेरणा देगा। गौरतलब है कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से नवांकुर और स्थापित रचनाकारों को सम्मानित करने की पहल अमर उजाला शब्द सम्मान का आयोजन किया जा रहा है,
जो सिर्फ साहित्य का, साहित्य के लिए, साहित्य को समर्पित होगा। 2018 के लिए प्रविष्टियां और प्रस्ताव आमंत्रण किए जा रहे हैं। हिंदी में किसी भी लेखक की पहली पुस्तक के लिए सम्मान राशि एक लाख रुपये दी जाएगी। इसके अलावा हिंदी में तीन साहित्य सम्मान वर्ग में तीन विधाओं में, तीन कृतियों पर विजेता को एक एक लाख प्रति दिए जाएंगे। इसमें कविता, कथा और गैर कथा (व्यंग्य, निबंध, यात्रा वृतांत, संस्मरण, रिपोर्ताज, पत्रकारिता, आलोचना, मानविकी आदि) शामिल है।
लेखन के प्रति विश्वास पक्का होगा...
अखबार की रीडरशिप ज्यादा होती है और ये सुनकर ही सुखद एहसास हो रहे है कि अमर उजाला पत्रकारिता के साथ-साथ शब्द सम्मान के जरिए साहित्य को भी उतना ही महत्व दे रहा है। जिस तरह के माहौल में अखबारें छप रही हैं, उसमें इतनी शिद्दत से साहित्य की बात करते रहना अमर उजाला की प्राप्ती है। इनाम के साथ कई बार लेखक को प्रोत्साहन भी मिलना है। उसका लेखन के प्रति विश्वास पक्का होता है। अमर उजाला शब्द सम्मान शुरू करके अपने इतिहास में एक और मील पत्थर जोड़ रहा है, इसके लिए ये संस्थान बधाई का पात्र है। इस कदम से प्रेरण लेनी बनती है।
- डा. मनमोहन
काव्य पाठ
साहित्य के प्रति अच्छी सोच का नतीजा...
जब सारा कुछ ही हाशिए पर जा रहा है, ऐसे में ये सुनना कि अमर उजाला पहल करते हुए साहित्यकारों को सम्मान दे रहा है, एक सुखद बात है। पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यकारों को शब्द सम्मान देने का प्रयास अमर उजाला की अच्छी सोच का नतीजा है। जब लेखक को पशंसा के साथ-साथ राशि भी मिले तो लेखन के स्तर में भी सुधार होता है। अमर उजाला ऐसी अखबार है जो साहित्य के प्रति हमेशा ही अच्छा सोचती है। शब्द सम्मान शुरू करना अपने आप में अमर उजाला की बहुत बड़ी प्राप्ती है।
- चंद्र त्रिखा
बाजारवाद से ऊपर उठकर किया गया प्रयास...
साहित्य में अखबारों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब एक पत्रकार खुद को साहित्य का हिस्सा देखकर सोचता है तो उसका अमना भी विकास होता है। आज के दौर में अखबारों में एक होड़ लगी है आगे बढ़ने की। गलाकाटु और बाजारवाद की सोच बहुत नुकसान कर रही है। ऐसे में साहित्य की जिम्मेदारी ज्यादा है। अमर उजाला हमेशा से ही साहित्य और साहित्यकारों के प्रति संजीदा रहा है। साहित्य के विकास के लिए अमर उजाला आवाज भी उठाता रहा है और आवाज बनता भी रहा है। अमर उजाला का शब्द सम्मान शुरू करना एक और सार्थक प्रयास है। इससे नए साहित्य और साहित्यकारों को एक नया मंच भी मिलेगा। - फूलचंद मानव
अखबारी दुनिया में मिसाल कायम होगी...
आज तक इतने सालों में किसी भी अखबार ने साहित्यिक गरिमा और इसके उत्थान के प्रति ऐसा जागरूक और सराहनीय कदम नहीं उठाया होगा। ये जिस तरह की पहल अमर उजाला अखबार ने "शब्द सम्मान के रूप में शुरू करके पूरी दुनिया में एक मिसाल कायम की है। किसी भाषा के साहित्य के लिए इतनी निष्ठा दिखाई है। वाकई यह कदम एक सराहनीय प्रयास है मेरा विश्वास है कि बाकी अखबारों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक जरिया साबित होगा। इसके लिए अमर उजाला बधाई का पात्र है।
- नवीन नीर
विश्व काव्य
अखबार साहित्य के प्रति सोचे..बड़ी बात है...
अखबार चाहे तो समाज में सब कुछ कर सकता है। बड़ी बात ये है कि इस बार अमर उजाला शब्द सम्मान के जरिए एक नया अध्याय लिखने जा रहे है। कोई अखबार साहित्य के लिए ऐसा सोचे, ये कोई छोटी बात नहीं है। लेखकों को इनाम देने के लिए जो प्रयास शुरू किया जा रहा है, उसके लिए अमर उजाला विशेषतौर पर बधाई का पात्र है। इस कदम को जी आयां नूं कहना बनता है। अखबारें जब लेखकों को इतनी सकारात्मक नजर से देखती हैं, तो समाज का भला होता है। अमर उजाला का प्रयास काबिलेतारीफ है।
- मंजीत इंद्रा
लेखकों को ऐसे ही प्रोत्साहन मिलना चाहिए...
अमर उजाला शब्द सम्मान के जरिए एक नया कदम उठा रहा है। ये अपने आप में एक शुभ शगुन है। कई कारण हैं कि क्रिएटिविटी खत्म हो रही है। जिंदगी की जल्दबाजी ने बहुत कुछ खत्म कर दिया है। लेखकों के अंदर संवेदनाएं हैं, उन्हें ऐसे प्रोत्साहन मिलने चाहिए। अमर उजाला का साहित्य के प्रति उठाया जा रहा ये कदम बढ़िया है। इसमें ये होना चाहिए कि जो पैनल सम्मान के लिए चुनाव करे, वो साहित्य को ध्यान में रखकर ही अपनी राय पेश करे, तो ये प्रयास ज्यादा सफल होगा। साहित्य के प्रति किया जा रहा अमर उजाला का ये प्रयास प्रशंसनीय है।
- गुरभजन गिल्ल