Alphons Kannanthanam and chief minister badal
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को पहली बार अपना अलग प्रशासक मिलने जा रहा है। दिल्ली में ‘डेमोलिशन मैन’ के तौर पर मशहूर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी एवं बीजेपी नेता केजे अल्फोंस को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक सुर में इसका विरोध किया है। बादल ने केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। सूत्रों के अनुसार इसके बाद फिलहाल केंद्र ने नियुक्ति आदेश टाल दिया है।
पंजाब में आतंकवाद के दौर से चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी सूबे के राज्यपाल को सौंपी जा रही थी। केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ का प्रशासक किसी अन्य को बनाने से हलचल मच गई है। राजनीतिक गलियारे में केंद्र के इस कदम से पंजाब का रुतबा घटने के रूप में देख रहे हैं। अब तक पंजाब चंडीगढ़ पर अपना दावा करता आ रहा है, लेकिन इस कदम से पंजाब को जोरदार झटका लगा है।
मुख्यमंत्री बादल ने जहां केंद्र से फैसले पर दोबारा विचार के लिए कहा है वहीं, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र के फैसले को सिरे से खारिज किया है। कैप्टन ने कहा कि यह कदम अन्यायपूर्ण है और इसका उद्देश्य पंजाब से चंडीगढ़ छीनना है। उधर, विधानसभा चुनाव में जोर शोर से उतरी आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में अकाली दल और भाजपा को घेरे में लेते हुए चंडीगढ़ में राज्यपाल के स्थान पर किसी अन्य को प्रशासक तैनात करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।