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कोरोनाः चंडीगढ़ में अब सेक्टर 48 में भी भर्ती होंगे मरीज, रिपोर्ट निगेटिव होने पर मिलेगा इलाज

Mon, 11 May 2020 01:39 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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चंडीगढ़ में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने अब आयुर्वेद कॉलेज के साथ सेक्टर-48 स्थित 100 बेड के नए हॉस्पिटल में भी इन्हें भर्ती करने की व्यवस्था करने का आदेश दिए हैं। इसके बाद जीएमसीएच-32 के डायरेक्ट प्रिंसिपल डॉ. बीएस चवन ने शनिवार की सुबह मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रवि गुप्ता व अन्य अधिकारियों के साथ सेक्टर-48 के हॉस्पिटल का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की मौजूदा स्थिति देखी और बंद पड़े वार्डों को तत्काल व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।
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बता दें कि 48 हॉस्पिटल में जीएमसीएच-32 के चार वार्ड के मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा था लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पतालों की ओपीडी बंद होने पर उसे भी खाली करा दिया गया था। तब से अस्पताल में ताला बंद था। प्रशासन के निर्देशानुसार, अब कोरोना के मरीजों में मामूली लक्षण पाए जाने पर अब उन्हें पीजीआई में दाखिल नहीं किया जाएगा। उन्हें श्री धन्वंतरी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल एंव कालेज के साथ सेक्टर-48 के 100 बेड के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

इसके तहत श्री धन्वंतरी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में 40 बेड का कोविड हॉस्पिटल तैयार किया गया है। यहां पर आयुष मंत्रालय के प्रोटोकॉल के अनुसार 3 तरह की आयुर्वेदिक दवाओं आयुष 64 टेबलेट और अगस्त हरितिका चटनी के अलावा अनु तेल का इस्तेमाल किया जाएगा। धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज के जनरल सेक्रेटरी डॉ. नरेश मित्तल ने बताया कि आयुर्वेद के क्षेत्र में ट्रायल के लिए देशभर में चंडीगढ़ के धनवंतरी आयुर्वेदिक कॉलेज को चुने गए हैं। पीजीआई से 9 मरीज श्री धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज के कोविड सेंटर में शिफ्ट हो चुके हैं।
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रिपोर्ट नेगेटिव होने पर ही पंचकूला व मोहाली के मरीज को चंडीगढ़ में मिलेगा इलाज

पंचकूला और मोहाली के लोगों का चंडीगढ़ के अस्पतालों में इलाज करने से पहले अब कोरोना निगेटिव रिपोर्ट देखी जाएगी। यह निर्णय शहर में तेजी से बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देखते हुए लिया गया है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में इस नियम को लागू कर बिना टेस्ट कराए जाने वाले मरीजों को लौटा दिया जा रहा है। जीएमएसएच-16 में शनिवार को नयागांव की एक गर्भवती महिला को इस नियम का हवाला देकर देखने से इनकार कर दिया गया।

उसे कहा गया कि पहले अपने जिले के अस्पताल में कोरोना का टेस्ट करवाकर उसकी निगेटिव रिपोर्ट लेकर आए। उसके बाद ही यहां इलाज होगा। ऐसे में महिला को वापस लौटना पड़ा। इस संदर्भ में अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि अगर कोई मरीज गंभीर रूप से बीमार है, तो उसे इमरजेंसी में भेजा जा रहा है। वहां पर प्रोटोकोल के तहत अन्य टेस्टों के साथ-साथ उसका कोरोना टेस्ट भी करवाया जा रहा है।

जहां तक अन्य स्टेट के मरीजों के लिए कोरोना टेस्ट कराना अनिवार्य करने की बात है तो इसके लिए सरकार की गाइडलाइन है। उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि इंटर स्टेट कोई भी मरीज आता है तो उसका पहले कोरोना टेस्ट करवाओ और रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही उसका इलाज किया जाए। गवर्नमेंट ने सरकारी अस्पतालों में फैल रहे कोरोना के मरीजों की संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया है। निगेटिव रिपोर्ट के साथ आए किसी भी मरीज का इलाज करने में हमें कोई समस्या नहीं है।
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