निरंकारी भवन के बाहर तैनात पुलिस बल
इंग्लैंड में पंजाबी अलगाववादियों की रेफरेंडम 20-20 कांफ्रेस के बाद भी कश्मीर के अलगाववादी संगठनों ने पंजाब के खालिस्तान समर्थकों का खुलकर समर्थन करने का एलान किया था। इस एलान के बाद से दोनों सूबों के इन संगठनों ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए पंजाब का माहौल खराब करने की तैयार कर ली है। अमृतसर के निरंकारी सत्संग भवन में आतंकी हमला भी पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां इसी सक्रियता का परिणाम मान रही हैं।
विस्फोटक सामग्री की क्षमता जांच रहे फोरेंसिक एक्सपर्ट
उधर, अमृतसर के निरंकारी भवन पर हुए आतंकी हमले में किस तरह की विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, उसकी क्षमता और तीव्रता की जांच स्पेशल फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम कर रही है। सूत्रों ने बताया कि ये जांच की जा रही है कि निरंकारी भवन में जिस विस्फोटक सामग्री से ब्लास्ट किया गया क्या वे सचमुच ग्रेनेड था या किसी अन्य तरह के बम का इस्तेमाल इस घटना में किया गया था। दरअसल, इस जांच के बाद एजेंसियां ये जानना चाहती हैं कि इस तरह के विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल पहले कौन आतंकी संगठन कर चुके हैं। इससे हमला करने वाले आतंकी संगठनों की पहचान होने में बड़ी मदद मिल सकती है।