चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली के सेक्टर-69 में 961 पूर्ण विकसित पेड़ों को उखाड़े जाने के आरोपों वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए मामले को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया। यह मामला ऐसे समय उठा है, जब हाईकोर्ट पहले ही पंजाब और हरियाणा में पेड़ों की कटाई पर सामान्य प्रतिबंध लगा चुका है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप कौन-सा सार्वजनिक मुद्दा उठा रहे हैं?
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सेक्टर-69 में 961 पूरी तरह विकसित पेड़ हैं और उन्हें वन क्षेत्र के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेड़ों को उखाड़ने के लिए भारी अर्थ मूविंग मशीनरी साइट पर पहुंचा दी गई है। अंतरिम राहत की मांग करते हुए वकील ने अदालत से आग्रह किया कि स्थल पर यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने का आदेश दिया जाए अन्यथा सभी पेड़ उखाड़े जा सकते हैं। दलीलों को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से आवेदन के साथ संलग्न तस्वीरों का हवाला दिया गया जिनमें कथित तौर पर भारी मशीनरी दिखाई गई है। हालांकि, पीठ ने तस्वीरों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि हमें नहीं पता ये तस्वीरें कब ली गईं। इसका कोई स्पष्ट आधार नहीं है। इस पर वकील ने कहा कि तस्वीरें 18 फरवरी को ली गई थीं और उन्होंने इसे प्रमाणित भी किया है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट पहले ही पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है और याचिकाकर्ता उस आदेश पर भरोसा कर सकता है। गौरतलब है कि दिसंबर में जनहित की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि बिना अदालत की अनुमति के पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। इनमें से एक याचिका मोहाली निवासी परनीत कौर ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी ओर से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक गैर-वन भूमि पर बड़े पैमाने पर परिपक्व पेड़ों की कटाई और उखाड़ने का काम किया जा रहा है।