विधानसभा चुनाव के नतीजों ने यमुनानगर जिले में एक नया रिकार्ड बना दिया है। अंबाला से अलग होकर जिले के गठन से लेकर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में पहली बार जिले की सभी सीटों पर सत्ता पक्ष के विधायक होंगे। जिले में विकास की रफ्तार को बढ़ाने के लिए यह सुखद संकेत है।
पिछले 25 सालों के दौरान जिले में हुए विधानसभा चुनाव में जिस पार्टी की प्रदेश में सरकार बनी, जिले में उसके सभी प्रत्याशी कभी भी जीत हासिल नहीं कर पाए। जिले में अधिकतर विपक्ष के विधायक ही बनते रहे हैं। पिछले पांच विधानसभा चुनावों से ऐसा ही होता आ रहा है।
इन चुनावों में 24 विधायक विधानसभा में पहुंचे, जिनमें 14 विपक्षी दलों के थे। वर्ष 2000 में सरकार बनाने वाले इनेलो-भाजपा गठबंधन के सबसे अधिक तीन प्रत्याशी जीतने में कामयाब रहे थे। जिले के विकास में पिछड़ने का एक बड़ा कारण यह भी रहा है। अधिकतर विपक्षी विधायक तो विधानसभा में अपने हलके की मांगों को सही ढंग से नहीं उठा पाए।
सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के हलके में विकास कार्य करवाने में दिलचस्पी नहीं ली। इसका खामियाजा जिले की जनता ने भुगता। इस विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन तो किया ही, जिले में भी विपक्ष का विधायक बनने की परंपरा टूट गई। जिले की तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशी खासे अंतर से चुनाव जीते हैं। जबकि साढौरा में जीत का अंतर करीब छह हजार वोटों का रहा।
यही नहीं इस बार जिले में सत्ता पक्ष के सांसद भी हैं। जिले की यमुनानगर, जगाधरी और साढौरा विस सीट अंबाला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। अंबाला सीट पर भाजपा के रतनलाल कटारिया सांसद है। वहीं रादौर विस सीट कुरुक्षेत्र लोस सीट के अंतर्गत आती है। कुरुक्षेत्र सीट पर भी भाजपा के राजकुमार सैनी सांसद है।
1991 : सरकार कांग्रेस की, पांच में से तीन विधायक विपक्ष के
वर्ष 1991 में कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। इस चुनाव में यमुनानगर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राजेश कुमार और छछरौली से कांग्रेस प्रत्याशी असलम खान चुनाव जीते। जबकि जगाधरी, रादौर और साढौरा सीट विपक्ष के खाते में गई।
1996: हविपा-भाजपा की सरकार में पांच में से तीन विधायक विपक्ष के
वर्ष 1996 में हविपा-भाजपा ने मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई। उस चुनाव में यमुनानगर से भाजपा प्रत्याशी कमला वर्मा और जगाधरी से हविपा उम्मीदवार सुभाष चंद ने जीत हासिल की। जबकि रादौर, साढौरा और छछरौली सीट पर दूसरे दल के प्रत्याशी और एक आजाद उम्मीदवार चुनाव जीता।
2000 : इनेलो-भाजपा की सरकार में पांच में से दो विधायक विपक्ष के
इस चुनाव में इनेलो-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। इन दोनों दलों के तीन उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। छछरौली से भाजपा प्रत्याशी कंवरपाल, रादौर से इनेलो के बंताराम और साढौरा से इनेलो के बलवंत सिंह चुनाव जीते थे। इस चुनाव में यमुनानगर सीट कांग्रेस की झोली में गई। जबकि जगाधरी से बसपा के प्रत्याशी जीते थे।
2005 : कांग्रेस की सरकार में पांच में से तीन विधायक विपक्ष के
वर्ष 2005 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन जिले से कांग्रेस के दो उम्मीदवार ही जीत हासिल कर पाए। यमुनानगर से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. कृष्णा पंडित और जगाधरी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष चौधरी विधानसभा में पहुंचे। रादौर, साढौरा और छछरौली सीट पर विपक्षी दलों का कब्जा रहा।
2009: कांग्रेस की सरकार में चार में से तीन विधायक विपक्षी
वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी। इस चुनाव में जिल में केवल एक सीट कांग्रेस की झोली में आई, जबकि तीन सीटों पर दूसरे दलों के प्रत्याशी जीते। इस चुनाव में साढौरा से राजपाल भूखड़ी जिले से कांग्रेस के एकमात्र विधायक चुने गए थे।