हरियाणा सरकार को सीबीआई देहरादून के अधिकारी अखिल कौशिक ने फर्जी बोर्ड के बारे में विस्तृत पत्र भेजा है। जिसका संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव हरकत में आई हैं। इस पत्र की कॉपी सरकार ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के के सचिव को भी भेजी है। दोनों ही आयोग भविष्य में ध्यान रखेंगे कि कोई भी अभ्यर्थी मध्य भारत ग्वालियर बोर्ड की दसवीं, बारहवीं की अंकतालिका के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन न करे।
एमएचआरडी, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सरकारों ने नहीं दी बोर्ड को मंजूरी
मुख्य सचिव की ओर से सभी विभागों को भेजे गए पत्र में यह भी बताया गया है कि मध्य भारत ग्वालियर के नाम से किसी बोर्ड को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने कोई मंजूरी और मान्यता नहीं दी है। इस बोर्ड की ओर से जारी किए गए सभी प्रमाण पत्र गैर कानूनी हैं।
आजादी के पहले से चले आ रहे बोर्ड 1947 के बाद अवैध घोषित हो गए थे। 1952 में सीबीएसई अस्तित्व में आ गया था। इसके बाद इन बोर्ड की कोई मान्यता नहीं रही। इस फर्जी बोर्ड ने उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट 1921 में अपना नाम होने का गलत फायदा उठाया और 2010-11 में ट्रस्ट डीड के तहत अपने बोर्ड को पुन: स्थापित करते हुए पूरे देश में गतिविधियां संचालित करनी शुरू कर दीं।