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हरियाणा में सभी कर्मचारियों की अंकतालिका की होगी जांच, फर्जी निकलने पर रद्द होगी नियुक्ति

Sat, 09 Nov 2019 02:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हरियाणा सरकार अपने सभी कर्मचारियों की दसवीं, बारहवीं कक्षा की अंकतालिका की जांच कराने जा रही है। सरकार ने यह निर्णय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन मध्य भारत ग्वालियर के फर्जी निकलने पर लिया है। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि बोर्ड ने पैसे कमाने के लिए दसवीं और बारहवीं के बेहिसाब प्रमाण पत्र बिना परीक्षा लिए ही देश भर में वितरित किए हैं, जिनकी कोई मान्यता नहीं है। 

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हरियाणा के कर्मचारियों की दसवीं-बारहवीं की अंकतालिका की जांच में अगर कोई प्रमाण पत्र संबंधित बोर्ड का मिलता है तो उनकी नियुक्ति रद्द कर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सभी डीसी, बोर्ड, निगमों के प्रबंधन निदेशकों, मुख्य प्रशासकों के साथ ही सभी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को उनके अधीन कार्यरत कर्मचारियों की अंकतालिका जांचने के निर्देश जारी कर दिए हैं। 

साथ ही कहा कि किसी भी कर्मचारी की अंततालिका मध्य भारत ग्वालियर बोर्ड के नाम से मिलती है तो तुरंत उसकी नियुक्ति रद्द कर मुख्य सचिव कार्यालय को कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी जाए। सीबीआई, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा देहरादून ने इस फर्जी बोर्ड के खिलाफ दो आपराधिक केस भी दर्ज किए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस फर्जी बोर्ड का भंडाफोड़ किया है।

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देहरादून सीबीआई के पत्र के बाद हरकत में आई सरकार

हरियाणा सरकार को सीबीआई देहरादून के अधिकारी अखिल कौशिक ने फर्जी बोर्ड के बारे में विस्तृत पत्र भेजा है। जिसका संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव हरकत में आई हैं। इस पत्र की कॉपी सरकार ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के के सचिव को भी भेजी है। दोनों ही आयोग भविष्य में ध्यान रखेंगे कि कोई भी अभ्यर्थी मध्य भारत ग्वालियर बोर्ड की दसवीं, बारहवीं की अंकतालिका के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन न करे।

एमएचआरडी, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सरकारों ने नहीं दी बोर्ड को मंजूरी
मुख्य सचिव की ओर से सभी विभागों को भेजे गए पत्र में यह भी बताया गया है कि मध्य भारत ग्वालियर के नाम से किसी बोर्ड को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने कोई मंजूरी और मान्यता नहीं दी है। इस बोर्ड की ओर से जारी किए गए सभी प्रमाण पत्र गैर कानूनी हैं। 

आजादी के पहले से चले आ रहे बोर्ड 1947 के बाद अवैध घोषित हो गए थे। 1952 में सीबीएसई अस्तित्व में आ गया था। इसके बाद इन बोर्ड की कोई मान्यता नहीं रही। इस फर्जी बोर्ड ने उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट 1921 में अपना नाम होने का गलत फायदा उठाया और 2010-11 में ट्रस्ट डीड के तहत अपने बोर्ड को पुन: स्थापित करते हुए पूरे देश में गतिविधियां संचालित करनी शुरू कर दीं।
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