इस बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है। शरीर में ऐंठन महसूस होती है। इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है। चक्कर आना, बच्चा बेहोश हो जाता है। दौरे पड़ने लगते हैं। कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत भी हो सकती है। आमतौर पर यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है।
बचाव के लिए क्या करें
ऐसे में जब चमकी बुखार के कारणों का ही ठीक से पता नहीं है। इससे बचाव का कोई सटीक उपाय भी नहीं है। हालांकि, कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। जारी एडवाइजरी के अनुसार, बच्चे को धूप और गर्मी से बचाकर रखें। पोषक आहार खिलाएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें। खाली पेट लीची बिल्कुल नहीं खाएं।
अगर सुबह उठकर बच्चे को चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो तो उसे तुरंत ग्लूकोज या चीनी घोलकर पिला दें। अगर यह समस्या शुगर लो होने की वजह से हुई होगी तो ग्लूकोज पीने से ठीक हो जाएगी। किसी भी तरह के बुखार या अन्य बीमारी को नजरअंदाज नहीं करें। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।