प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर करते हुए शिरोमणि अकाली दल के सिटिंग एमपी शेर सिंह घुबाया का परिवार कांग्रेस ज्वाइन करेगा। घुबाया के बेटे वरिंदर सिंह और पत्नी कृष्णा रानी मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रेस कांफ्रेंस में इसका औपचारिक एलान करेंगे।
फिरोजपुर से अकाली सांसद घुबाया पहले जलालाबाद से शिअद विधायक थे। बाद में उन्हें डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के लिए यह सीट छोड़ दी थी। बदले में सुखबीर ने उन्हें फिरोजपुर संसदीय सीट से लोकसभा पहुंचाया था, लेकिन पिछले कुछ समय से घुबाया की सुखबीर के साथ नहीं बन रही थी। वह अकाली दल से अपने बेटे के लिए टिकट भी मांग रहे थे, जिसे पार्टी नेतृत्व ने नकार दिया था। जिसके चलते उन्होंने अपने परिवार को कांग्रेस में शामिल कराने का फैसला किया।
वह मौजूदा सांसद हैं इसलिए अगर वह कांग्रेस में जाते हैं तो उनकी संसद सदस्यता चली जाएगी। इसलिए घुबाया फिलहाल अधिकारिक तौर पर शिअद में ही रहेंगे। कांग्रेस के गुरहरसहाय के विधायक राणा गुरमीत सोढी ने इस सियासी उलटफेर की पटकथा लिखी है। क्योंकि इससे गुरहरसहाय, जलालाबाद और फाजिल्का हलकों में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
आज फिर होगी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक
कैप्टन अमरिंदर सिंह
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घुबाया रायसिख बिरादरी का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिसके जलालाबाद व गुरहरसहाय में 48-48 प्रतिशत वोट हैं। फाजिल्का में भी बिरादरी का करीब 45 फीसदी का मजबूत वोट बैंक है। गुरहरसहाय में कंबोज बिरादरी के करीब 32 फीसदी वोट हैं, जिसे देखते हुए आम आदमी पार्टी ने इस बिरादरी के मलकीत सिंह को टिकट दिया है जो राणा सोढी के लिए चिंता का विषय बन सकता था। इसीलिए उन्होंने चुनाव से पहले घुबाया को अपने पाले में कर लिया। अब कांग्रेस घुबाया के बेटे वरिंदर घुबाया को फाजिल्का से टिकट दे सकती है। हालांकि इसकी भनक लगने के बाद हलके से टिकट के कुछ दावेदारों ने पार्टी प्लेटफार्म पर इसका विरोध भी जताया है।
आज फिर होगी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक
कांग्रेस के बाकी उम्मीदवारों पर मंथन के लिए केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक नई दिल्ली में राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत की अगुवाई में हुई। जिसमें कुछ सीटों को लेकर विमर्श किया गया, लेकिन अभी सहमति नहीं बन सकी है। मंगलवार दोपहर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक दोबारा होगी। कमेटी को आठ दिसंबर से पहले उम्मीदवार फाइनल करके सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को भेजने हैं क्योंकि सीईसी की आठ को होने वाली बैठक में पंजाब के सारे उम्मीदवार फाइनल किए जाने की उम्मीद है।