पंजाब के पूर्व विधायक और शिरोमणि अकाली दल के उपाध्यक्ष अमरपाल सिंह उर्फ बोनी अजनाला ने अपनी ही पार्टी के नेता बिक्रम मजीठिया से खुद और परिवार को जान का खतरा बताया है। बोनी ने सुरक्षा के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 23 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
बोनी अजनाला ने एडवोकेट महेंद्र कुमार वर्मा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह दो बार एमएलए रह चुके हैं और वर्तमान में शिरोमणि अकाली दल (बादल) के उपाध्यक्ष हैं। उसके पिता रतन सिंह अजनाला भी सीनियर अकाली नेता हैं। याची ने बताया कि उसने अपने दोस्त मनिंदर सिंह उर्फ बिट्टू औलख को 2005 में बिक्रम मजीठिया से मिलवाया था। 2007 में मजीठिया जब विधायक बने तो याची से रंजिश रखनी शुरू कर दी। याची का राजनीतिक करियर खत्म करने के लिए मजीठिया ने बिट्टू को दो किलो की नशा सामग्री के साथ झूठे केस में फंसा दिया। जबकि बिट्टू का नशा माफिया से कोई लेना देना नहीं है। मजीठिया के तीन साथी इंटरनेशनल तौर पर नशे का कारोबार करते हैं।
मजीठिया के खिलाफ जब केस दर्ज कर जांच शुरू की गई तो चन्नी सरकार में बनी एसआईटी ने याची को बयान के लिए बुलाया। जब याची ने मजीठिया और उसके साथियों का नाम लिया तो एसआईटी प्रमुख ने ऐसा न करने की सलाह दी। याची इस बात से इतना घबरा गया कि उसने मजीठिया के खिलाफ बयान नहीं दिया। अब नई एसआईटी दोबारा उसे बयान के लिए बुला रही है।
इसी बीच मजीठिया के करीबी अंतरराष्ट्रीय तस्कर लगातार उसे धमकी दे रहें है। याची ने कहा कि उसे और उसके पूरे परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। इसी बीच पंजाब सरकार ने उसको और उसके परिवार को दी गई सुरक्षा वापस ले ली। याची ने कहा कि उसे अभी भी माफिया और मजीठिया से खतरा है। उसकी सुरक्षा बहाल की जाए।