जंग-ए-आजादी स्मारक में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे सीनियर पत्रकार बरजिंदर सिंह हमदर्द के समर्थन में कांग्रेस की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी बड़ी पार्टियों के नेता एक मंच पर इकट्ठे हुए। इसी दौरान नवजोत सिद्धू और बिक्रम मजीठिया गले मिले।
जालंधर में गुरुवार को पंजाब के विपक्षी दलों की बैठक के दौरान एक ऐसा वाकया सामने आया, जिससे वहां मौजूद सभी लोग भौचक्के रह गए। पत्रकार बरजिंदर सिंह हमदर्द को विजिलेंस की ओर से तलब किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसमें शामिल होने पहुंचे अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और उनके धुर विरोधी माने जाते नवजोत सिद्धू गर्मजोशी से एक दूसरे के गले मिले।
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सिद्धू और मजीठिया राजनीति में हमेशा एक दूसरे के खिलाफ ही खड़े दिखे हैं। मजीठिया से गले मिलने के बाद सिद्धू ने मंच से कहा कि मैंने जफ्फी डाली है, पप्पी नहीं ली। इस पर सभी लोग ठहाका मारकर हंसे। इसके बाद सिद्धू ने कहा कि मजीठिया के साथ उनके वैचारिक मतभेद हैं। कोई निजी दुश्मनी नहीं है।
मनमुटाव राजनीतिक हैं: सिद्धू
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान ने कहा कि इंसान के चाहे कितने भी मनमुटाव हों, लेकिन जब दुनिया के सामने मिलें तो कम से कम इस लायक तो हों कि वह हाथ मिला लें। मेरे भी मनमुटाव हैं, लेकिन वह राजनीतिक हैं।
पत्रकार पर विजिलेंस की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष
जंग-ए-आजादी स्मारक में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे सीनियर पत्रकार बरजिंदर सिंह हमदर्द के समर्थन में कांग्रेस की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी बड़ी पार्टियों के नेता एक मंच पर इकट्ठे हुए। उन्होंने सरकार को तानाशाह, पंजाब और पंजाबी का विरोधी बताया। नेताओं ने कार्रवाई न रोकने पर कड़े संघर्ष की चेतावनी दी।
सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदे पहुंचे। जिसमें सीएलपी लीडर प्रताप सिंह बाजवा, शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल, भाजपा के पंजाब प्रधान अश्वनी शर्मा, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू, अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा, पूर्व विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया, कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी, भाजपा नेता सुनील जाखड़, कांग्रेसी विधायक और पूर्व मंत्री परगट सिंह, होशियारपुर से विधायक डॉक्टर राजकुमार चब्बेवाल, विधायक विक्रमजीत सिंह चौधरी और अन्य बड़े नेता भी शामिल हुए।
नेताओं ने एक सुर में कहा कि पंजाब की मान सरकार सिर्फ दिल्ली वालों की कठपुतली बन कर रह गई है। मान सरकार ने सिर्फ बरजिंदर सिंह हमदर्द पर नहीं बोला है, बल्कि प्रेस की आजादी पर हमला बोला है। जिस व्यक्ति की पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत को इतनी बढ़ी देन हो और जिसकी तारीफ खुद राष्ट्रपति ने की और पद्म विभूषण से लेकर पद्मश्री दिया हो उसके व्यक्तित्व पर अंगुली उठाना निंदनीय है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि बरजिंदर सिंह हमदर्द को दबाने के लिए सरकार ओछे हथकंडे अपना रही है। सरकार दमनकारी नीतियां अपना रही है। बरजिंदर सिंह ने पहले विरासत-ए-खालसा और उसके बाद जंग-ए-आजादी के लिए अपना बहुमूल्य समय दिया ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास को जान सकें समझ सकें। भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्विनी शर्मा ने कहा कि अहंकार में डूबी सरकार के मुखिया अपने आका को खुश करने के लिए लोकतंत्र में बोलने की आजादी के मिले अधिकार को छीनने की कोशिश कर रही है। ऐसे हालात में सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए नहीं तो लोकतंत्र बचेगा ही नहीं।