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भाजपा पर भारी पड़ सकती है अकाली दल की फूट, माझा-दोआबा में टकसाली नेता बनेंगे मुसीबत

Thu, 03 Jan 2019 09:28 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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BJP - फोटो : BJP
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पंजाब में दस साल तक गठबंधन शासन चला चुके अकाली दल और भाजपा के लिए नया साल राजनीतिक कठिनाइयां लेकर आया है। शिरोमणि अकाली दल के दोफाड़ हो जाने से जहां अकाली दल मुश्किल में है वहीं अकाली दल से अलग होकर बना नया अकाली दल (टकसाली) भाजपा के लिए मुसीबत बनने जा रहा है। 

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बेअदबी की घटनाओं और बहिबलकलां व कोटकपूरा में पुलिस फायरिंग के मामलों में बुरी तरह घिरे अकाली दल को आगामी लोकसभा चुनाव में जनता के रोष का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन भाजपा की मुश्किल यह है कि नवगठित अकाली दल टकसाली का वर्चस्व सूबे के उस क्षेत्र में है जिसे अब तक भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। 

सूबे के माझा और दोआबा इलाके में भाजपा होशियारपुर, अमृतसर और तरनतारन जिले की लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करती रही है। विधानसभा चुनाव में भी अकाली दल के साथ सीट बंटवारे में भाजपा के खाते में ज्यादातर सीटें माझा-दोआबा की रही हैं। फिलहाल होशियारपुर लोकसभा सीट ही इस समय भाजपा के पास है और विजय सांपला सांसद हैं। 

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सांकेतिक तस्वीर
उधर, खडूर साहिब से सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा के अलावा उनके बेटे रविंदर सिंह , र्पू्व सांसद रतन सिंह अजनाला, उनके बेटे अमरपाल सिंह अजनाला, पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने शिअद से अलग होकर गत 16 दिसंबर को अकाली दल टकसाली का गठन किया। खास बात यह है कि इन टकसाली नेताओं का माझा-दोआबा के पंथक मतदाताओं में काफी प्रभाव रहा है। यही कारण है कि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन के तहत माझा-दोआबा की सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को सफलता मिलती रही।

अब नया अकाली दल सीधे-सीधे भाजपा के वोट ही काटेगा। रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद माझे से संबंधित एक दर्जन से अधिक टकसाली नेताओं के साथ बैठकें की हैं। तरनतारन के दो दफा सांसद रहे रतन सिंह अजनाला जो कि अजनाला विधानसभा क्षेत्र से भी चार बार विधायक रह चुके हैं, ने अपने पुराने हलके में संपर्क बनाने शुरू कर दिए हैं। 

सेवा सिंह सेखवां गुरदासपुर जिले के काहनूवान विधानसभा हलके से विधायक चुने जाते रहे हैं। दूसरी ओर, पंजाब में भाजपा का वर्चस्व हमेशा माझा-दोआबा की सीटों पर ही रहा है, जिन पर उसे शिअद के वोट बैंक की मदद से जीत हासिल होती रही है। लेकिन अब शिअद का वही वोटबैंक अकाली दल टकसाली के पाले में जाने के आसार बढ़ गए हैं। क्योंकि नए अकाली दल में ज्यादातर मांझा-दोआबा के स्थानीय नेता हैं और लंबे समय से अपने क्षेत्र में उनकी अच्छी साख है।
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