उधर, खडूर साहिब से सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा के अलावा उनके बेटे रविंदर सिंह , र्पू्व सांसद रतन सिंह अजनाला, उनके बेटे अमरपाल सिंह अजनाला, पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने शिअद से अलग होकर गत 16 दिसंबर को अकाली दल टकसाली का गठन किया। खास बात यह है कि इन टकसाली नेताओं का माझा-दोआबा के पंथक मतदाताओं में काफी प्रभाव रहा है। यही कारण है कि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन के तहत माझा-दोआबा की सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को सफलता मिलती रही।
अब नया अकाली दल सीधे-सीधे भाजपा के वोट ही काटेगा। रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद माझे से संबंधित एक दर्जन से अधिक टकसाली नेताओं के साथ बैठकें की हैं। तरनतारन के दो दफा सांसद रहे रतन सिंह अजनाला जो कि अजनाला विधानसभा क्षेत्र से भी चार बार विधायक रह चुके हैं, ने अपने पुराने हलके में संपर्क बनाने शुरू कर दिए हैं।
सेवा सिंह सेखवां गुरदासपुर जिले के काहनूवान विधानसभा हलके से विधायक चुने जाते रहे हैं। दूसरी ओर, पंजाब में भाजपा का वर्चस्व हमेशा माझा-दोआबा की सीटों पर ही रहा है, जिन पर उसे शिअद के वोट बैंक की मदद से जीत हासिल होती रही है। लेकिन अब शिअद का वही वोटबैंक अकाली दल टकसाली के पाले में जाने के आसार बढ़ गए हैं। क्योंकि नए अकाली दल में ज्यादातर मांझा-दोआबा के स्थानीय नेता हैं और लंबे समय से अपने क्षेत्र में उनकी अच्छी साख है।