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नागरिकता संशोधन कानूनः डैमेज कंट्रोल में जुटा अकाली दल, मुसलमानों को शामिल करने की उठाई मांग

Sun, 19 Jan 2020 04:31 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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डैमेज कंट्रोल में जुटा अकाली दल। - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को सीएए के खिलाफ लाए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के प्रहारों से असहज हुआ अकाली दल डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। अकाली दल की ओर से यह मांग उठाई गई है कि सीएए में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए। हालांकि इसके साथ ही पार्टी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को घेरने के लिए यह मांग भी उठाई है कि अफगानिस्तान में सताए गए सिखों को पंजाब में शरण दी जाए। अकाली दल ने इस मामले में भी खुद को सिखों की प्रमुख हितैषी पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

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विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जैसे ही अकाली दल के सदस्यों को यह कहकर फटकार लगाई-‘आपको शर्म आनी चाहिए और आप एक दिन पछताओगे तो पूरे सदन में सन्नाटा पसर गया। अकाली दल के सदस्य जो प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान काफी मुखर थे, पूरी तरह सकते में आ गए।

अकाली सदस्यों की कोई आवाज नहीं आई। इसके बाद जब कैप्टन ने यह कहा कि ऐसी बोली बोलते हुए उन्हें भी बुरा महसूस हो रहा है, तब माहौल कुछ सहज हुआ और अकाली दल के सदस्य डैमेज कंट्रोल में जुट गए। दल के नेता शरणजीत सिंह ढिल्लो ने कहा कि अकाली दल चाहता है कि कांग्रेस सरकार अफगानिस्तान से आए हजारों सिखों को सीएए के कारण मिल रही राहत का विरोध न करे। अकाली दल द्वारा सरकार के प्रस्ताव में इस संशोधन को शामिल करने की मांग भी की गई, जिसे स्पीकर ने सदन की नियमावली का हवाला देते हुए रद कर दिया। लेकिन उसके बाद भी अकाली दल के सदस्यों ने कोई विरोध नहीं किया। 

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सदन ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया और अकाली दल के सदस्य चुपचाप अपनी सीटों पर बैठे रहे। सदन के बाहर अकाली दल ने नए सिरे से बयान जारी कर यह जताने की कोशिश की कि अकाली दल तीनों देशों में बसे सिखों को लेकर चिंतित है। हालांकि इसके साथ ही पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुसलमानों को सीएए के दायरे में लाने के लिए एक्ट में संशोधन जरूरी है। 

हैरानी की बात यह है कि केंद्र में भाजपा की सहयोगी अकाली दल संसद में सीएए का समर्थन कर चुका है।  मुसलमानों को सीएए में लाने की मांग उन्होंने पंजाब सरकार के समक्ष उठाई है जबकि यह मांग केंद्र सरकार से नहीं की गई। अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि उनकी पार्टी की इच्छा थी कि कांग्रेस सरकार सदन में ऐसा प्रस्ताव पारित करे, जिसके तहत वह मुसलमानों को सीएए में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करे। 

उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस मुसलमानों को बचाने की नहीं बल्कि सिखों को दुख दे रही है, जो अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को सिखों को बताना पड़ेगा कि वह इस एक्ट के तहत उन सिखों को मिलने वाली राहत को क्यों रोक रहे हैं, जिन्होने भारत में शरण लेने के लिए अफगानिस्तान से पलायन किया है।
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