सदन ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया और अकाली दल के सदस्य चुपचाप अपनी सीटों पर बैठे रहे। सदन के बाहर अकाली दल ने नए सिरे से बयान जारी कर यह जताने की कोशिश की कि अकाली दल तीनों देशों में बसे सिखों को लेकर चिंतित है। हालांकि इसके साथ ही पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुसलमानों को सीएए के दायरे में लाने के लिए एक्ट में संशोधन जरूरी है।
हैरानी की बात यह है कि केंद्र में भाजपा की सहयोगी अकाली दल संसद में सीएए का समर्थन कर चुका है। मुसलमानों को सीएए में लाने की मांग उन्होंने पंजाब सरकार के समक्ष उठाई है जबकि यह मांग केंद्र सरकार से नहीं की गई। अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि उनकी पार्टी की इच्छा थी कि कांग्रेस सरकार सदन में ऐसा प्रस्ताव पारित करे, जिसके तहत वह मुसलमानों को सीएए में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करे।
उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस मुसलमानों को बचाने की नहीं बल्कि सिखों को दुख दे रही है, जो अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को सिखों को बताना पड़ेगा कि वह इस एक्ट के तहत उन सिखों को मिलने वाली राहत को क्यों रोक रहे हैं, जिन्होने भारत में शरण लेने के लिए अफगानिस्तान से पलायन किया है।