शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की कोर कमेटी ने हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा कमेटी का समर्थन करने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के संशोधित हलफनामे को साजिश करार दिया। कमेटी सदस्यों का कहना है कि कैप्टन का हलफनामा खालसा पंथ के दुश्मनों द्वारा सिखों की सबसे सर्वोच्च धार्मिक संसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को कमजोर करके और उस पर कब्जा करके सिख कौम की आध्यात्मिक शक्ति के स्रोतों पर हमला करने की पुरानी तथा गहरी साजिश है।
इस संबंध में सोमवार को पार्टी कार्यालय में हुई कोर कमेटी की मीटिंग में एक प्रस्ताव पास किया गया। इसका नेतृत्व अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने किया। एक अलग प्रस्ताव के माध्यम से पार्टी ने निर्णय किया कि पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के ध्यान में यह बात लाई जाएगी कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल किया ताजा हलफनामा पिछली राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे से न सिर्फ विपरीत है, बल्कि इसके बेहद गंभीर परिणाम निकल सकते हैं, क्योंकि यह खालसा पंथ के धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि सिख अपनी सबसे बड़ी धार्मिक जत्थेबंदी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में बटवारा डालने की कोशिशों का सख्त विरोध करते हैं।
हलफनामा गुरुधामों की शक्ति पर हमला करने की साजिश
कोर कमेटी ने प्रस्ताव में कहा कि खालसा पंथ द्वारा दी अद्वितीय कुर्बानियां, जोकि अपने चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा गुरुधामों की संभाल का हक हासिल करने के लिए लगाए जैतों का र्मोचा और अन्य र्मोचों के दौरान दी गई थी, पर कैप्टन उन पर मिट्टी डालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि यह खालसा पंथ का एक बिल्कूल ही अलग प्रबंध है। उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्वजों ने इस र्मोचे के दौरान गिरफतारियां दी थी। महात्मा गांधी ने इस र्मोचे की सफलता को भारत का पहला स्वतंत्रता आंदोलन करार दिया था।
लेकिन अंग्रेजों के मोहरे रजवाड़ों और महंतो ने हमेशा सिख र्मोचों और महात्मा गांधी का विरोध किया था। कैप्टन का हलफिया बयान उस रजवाड़ा मानसिकता का प्रतीक है और यह सिखों के विरूद्ध कांग्रेस के षड्यंत्रों के लिए फिट बैठता है। अकाली दल ने कहा कि अमरिंदर का शपथ पत्र कानूनी तथा सवैंधानिक तौर पर भी बेहद अजीब हैं और यह इस मुद्दे पर पिछली राज्य सरकार के हलफिया बयान के बिल्कूल विपरित है। पिछली सरकार द्वारा एसजीपीसी के टुकड़े करके हरियाणा के लिए अलग सिख गुरुद्वारा कमेटी बनाने का सख्त विरोध किया गया था।
कांग्रेस सरकार की सिखों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ पास प्रस्ताव में कहा गया कि हरियाणा में अलग सिख कमेटी बनाने संबधी पंजाब सरकार का ताजा हलफिया बयान सिखों के गुरुधामों में आध्यात्मिक शक्ति की जड़ों पर हमला करने के उद्देश्य से दिया गया है। अकाली दल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चेतावनी दी कि उसकी सिख पंथ के विरूद्ध कांग्रेस के पुराने सपनों को पूरा करने की कोशिशों का वही हश्र होगा, जो 2002 में उसकी एसजीपीसी पर कब्जा करने की कोशिशों का हुआ था। सिखों के दुश्मन की इस ताजा साजिश का सिख कौम द्वारा मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।
बहिबल कलां गवाह के मामले की जांच सीबीआई करे: शिअद
बैठक के बाद मीडिया को बातचीत में पार्टी प्रवक्ता सरदार हरचरन सिंह बैंस ने बताया कि कोर कमेटी ने बहिबल कलां के मुख्य गवाह की रहस्यमयी हालात में हुई मौत के संवेदनशील मामले में भी राज्यपाल से हस्तक्षेप का अनुरोध करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा राज्यपाल के ध्यान में बहिबल कलां केस के प्रमुख गवाह की पत्नी द्वारा लगाए गंभीर आरोपों को लाया जाएगा।
गवाह की पत्नी ने कांग्रेसी नेताओं कुशलदीप सिंह ढिल्लों तथा गुरप्रीत सिंह कांगड़ के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने मुख्य गवाह के परिवार का अपमान करने और उन पर दबाव डालने में राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ और मुख्यमंत्री के सलाहकार कुशलदीप सिंह ढिल्लों की संदिग्ध भूमिका के लिए दोनों कांग्रेसियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग भी की।
कोर कमेटी ने मांग की कि इस केस की जांच सीबीआई के हवाले की जाए। बैंस ने कहा कि इस मामले में जिन संदिग्ध परिस्थितियों में मुख्य गवाह की मौत हुई है, उसने राज्य में हुई बेअदबी की घटनाओं में कांग्रेस की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है।
अकाली दल ने हमेशा यह बात कही है कि बेअदबी के मामले अकाली-भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए इसके राजनीतिक विरोधियों द्वारा रची एक गहरी साजिश का परिणाम थे। अब इस साजिश की ताजा परतें सामने आ रही हैं।