श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा है कि हरियाणा की अलग कमेटी (एचएसजीएससी) और एसजीपीसी के बीच पैदा हुए विवाद को खत्म करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से एक तालमेल कमेटी गठित की जाएगी।
यह कमेटी दोनों पक्षों में समझौता करवाने में भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि तालमेल कमेटी दोनों पक्षों से बातचीत करके जो रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश करेगी, उस पर विचार करने के बाद ही पांच सिंह साहिबान दोबारा बैठक करेंगे और अपना अंतिम फैसला सुनाएंगे।
उन्होंने कहा कि अब यह मामला श्री अकाल तख्त साहिब के पास है। जब तक कोई सार्थक फैसले का आदेश जारी नहीं होता, तब तक शांति बनाए रखना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है।
हरियाणा की घटनाओं पर विचार विमर्श को बुलाई थी बैठक
ज्ञानी गुरबचन सिंह वीरवार को श्री अकाल तख्त साहिब पर हुई पांच सिंह साहिबान की बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत कर रहे थे। यह बैठक हरियाणा में तीन गुरुद्वारों पर एचएसजीएमसी समर्थकों द्वारा कब्जे के बाद हरियाणा में घटी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजित की गई थी।
उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के खिलाफ एचएसजीएमसी का साथ देने वाले संत बलजीत सिंह दादूवाल के बारे में अगली बैठक में विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आज की बैठक में गुरमीत सिंह तारमाला के केस पर भी विचार किया गया। तारमाला ने गुरु के नाम पर अपना निजी ट्रस्ट बनाकर गुरुघर और संगत की जायदाद पर निजी कब्जे कर लिए हैं। तारमाला के खिलाफ भी अगली बैठक में कार्रवाई के आदेश जारी होंगे।
गुरुद्वारों पर कब्जा कांग्रेस की साजिश
ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि हरियाणा के तीन ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर झींडा के नेतृत्व वाली तथाकथित एचएसजीएमसी द्वारा कब्जा किया जाना हरियाणा सरकार और कांग्रेस की सुनियोजित राजनीतिक साजिश है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब के सिखों को कांग्रेस की साजिश का शिकार न होते हुए शांति बनाए रखनी होगी। जत्थेदार ने कहा कि सिख धर्म के नियमों और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के खिलाफ कांग्रेस ने पहले तो अलग कमेटी का गठन करवाया, अब वहां सिखों में धड़ेबंदी करवाकर गुरुद्वारों पर कब्जे के लिए प्रेरित किया जा रहा है।