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पंचकूलाः एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में ईडी कोर्ट में सुनवाई, पेश होने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा

Tue, 25 Feb 2020 12:54 PM IST
खुशबू गोयल अवधेश शुक्ला, पंचकूला
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा
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एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) प्लॉट आवंटन मामले में मंगलवार को पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष ईडी कोर्ट में सुनवाई हुई। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अदालत में पेश हुए, लेकिन एजेएल हाउस के चेयरमैन मोती लाल वोरा सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे। मामले की अगली सुनवाई चार मार्च को होगी। बचाव पक्ष ने ईडी से डाक्यूमेंट्स की मांग की थी, जोकि चालान के साथ नहीं मिले थे।
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वहीं डाक्यूमेंट्स आज ईडी ने ईडी कोर्ट में पेश किए। एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में अगली सुनवाई में बचाव पक्ष डॉक्यूमेंट्स की स्क्रूटनी करेगा। पिछले साल 26 अगस्त को ईडी ने हुड्डा और वोरा के खिलाफ इस मामले में अभियोजन की शिकायत दाखिल की थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपये में दे दिया था।

पंचकूला सेक्टर-6 स्थित सी-17 नंबर एजेएल को आवंटित किया गया था। साल 2018 में ईडी ने इसे कुर्क कर लिया था। दरअसल, कथित तौर पर नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा संचालित किया जाने वाला एजेएल ग्रुप नेशनल हेराल्ड अखबार निकालता था। ईडी की जांच में पाया गया कि हुड्डा ने मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर यह प्लॉट दोबारा आवंटन की आड़ में नए सिरे से एजेएल को 1982 की दर (91 रुपए प्रति वर्ग मीटर) और ब्याज के साथ फर्जी तरीके से आवंटित कर दिया।
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ये है मामला

गौरतलब है कि 24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने एजेएल प्रकाशन समूह के हिंदी अखबार नवजीवन को आवंटित किया था। कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन वह 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई। इसके बाद 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने आवंटन रद्द करके प्लॉट को वापस ले लिया।

14 मार्च 1998 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुडा को प्लॉट आवंटन की बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को हुडा के चेयरमैन ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट आवंटन की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा लेकिन कानून विभाग ने आवंटन बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया। 18 अगस्त 1995 को नए आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई।

28 अगस्त 2005 को हुडा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट आवंटित कर दिया। साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके एक साल में काम पूरा करने को भी कहा। एजेएल अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज अखबारों का प्रकाशक रहा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर राज्य सतर्कता विभाग ने मई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया।

मुख्यमंत्री एचएसवीपी के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यह गड़बड़ी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुई, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। सतर्कता ब्यूरो ने 5 मई 2016 को आईपीएस की धारा 409, 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। 5 अप्रैल 2017 को राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ 120बी, 420 एवं सेक्टर 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) डी के तहत चार्जशीट दाखिल की।
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