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प्लॉट अलॉटमेंट केस: पंचकूला में ईडी की विशेष कोर्ट में सुनवाई, हुड्डा-वोहरा को मिली जमानत

Wed, 30 Oct 2019 01:17 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मोती लाल वोहरा - फोटो : फाइल फोटो
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बहुचर्चित एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में पंचकूला की में ईडी की विशेष कोर्ट में आज की सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 6 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। आज की सुनवाई के दौरान मामले के दोनों मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व एजेएल हाउस के चेयरमैन मोतीलाल वोरा को कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दे दी गई।
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दोनों को पांच-पांच लाख के बेल बांड पर अंतरिम जमानत दी गई। बचाव पक्ष द्वारा लगाई गई रेगुलर बेल एप्लीकेशन पर 6 नवंबर को सुनवाई होगी। छह नवंबर को सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय बचाव पक्ष की इस याचिका पर अपना जवाब दायर करेगा।

मामले में मंगलवार को विशेष कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कोर्ट में पेश हुए। लेकिन एजेएल हाउस के चेयरमैन मोती लाल वोहरा तबीयत खराब होने के चलते कोर्ट में पेश नहीं हो सके। उस अदालत ने मामले की आगामी सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
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ये है मामला

गौरतलब है कि 24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने एजेएल प्रकाशन समूह के हिंदी अखबार नवजीवन को अलॉट किया था। कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन वह 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई। इसके बाद 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट कैंसिल करके प्लॉट को वापस ले लिया।

14 मार्च 1998 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुडा को प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को हुडा के चेयरमैन ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा लेकिन कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया। 18 अगस्त 1995 को नए आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई।

28 अगस्त 2005 को हुडा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट कर दिया। साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके एक साल में काम पूरा करने को भी कहा। एजेएल अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज अखबारों का प्रकाशक रहा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर राज्य सतर्कता विभाग ने मई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया।

मुख्यमंत्री एचएसवीपी के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यह गड़बड़ी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुई, इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। सतर्कता ब्यूरो ने 5 मई 2016 को आईपीएस की धारा 409, 420 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। 5 अप्रैल 2017 को राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ 120बी, 420 एवं सेक्टर 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) डी के तहत चार्जशीट दाखिल की।
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