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हरियाणाः न पराली जल रही न उद्योग चल रहे, फिर भी पानीपत इतना प्रदूषित क्यों, जवाब दे सरकार

Wed, 13 Nov 2019 03:35 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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प्रदूषण
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किसान कह रहे हैं कि पराली नहीं जल रही है, अब तो इस पराली से तूडी बनाकर मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं उद्योगपतियों का कहना है कि पर्यावरण प्रदूषण प्रिवेंशन एवं कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) के आदेश पर 16 दिन से उनके उद्योग बंद हैं। ऐसे में पानीपत की हवा सोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक जहरीली रही।
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एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 458 रहा, जोकि हरियाणा के सभी जिलों में सबसे अधिक रहा। इतना ही नहीं पानीपत समेत इतनी जहरीली हवा प्रदेश के जिलों की हैं। जींद, हिसार, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम और भिवानी का एक्यूआई भी 400 से अधिक दर्ज किया गया। यानी कि हरियाणा में आपात स्थिति के बावजूद प्रदूषण पर काबू पाने में सरकार के साथ ही हर जिले का प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

प्रदूषण की श्रेणी गंभीर वाले जिले

जिला एक्यूआई प्रदूषण कारक तत्व
पानीपत गंभीर    458 पीएम 2.5
जींद गंभीर    446 पीएम 2.5
हिसार गंभीर    445 पीएम 2.5
फरीदाबाद गंभीर    406 पीएम 2.5
फतेहाबाद गंभीर    403 पीएम 10
गुरुग्राम गंभीर      402 पीएम 2.5
भिवानी गंभीर       398 पीएम 2.5

इन 10 जिलों की हवा बेहद खराब, एक्यूआई 300 से 400 के बीच
जिला एक्यूआई प्रदूषण कारक तत्व

रोहतक बेहद खराब 394 पीएम 2.5
करनाल बेहद खराब   368 पीएम 2.5
पलवल बेहद खराब   360 पीएम 2.5
कुरुक्षेत्र बेहद खराब   358 पीएम 2.5
बहादुरगढ़ बेहद खराब  343  पीएम 2.5
अंबाला बेहद खराब   332  पीएम 2.5  
यमुनानगर बेहद खराब  326 पीएम 2.5
कैथल बेहद खराब   325 पीएम 2.5
नारनौल बेहद खराब   322 पीएम 2.5
सोनीपत बेहद खराब   309 पीएम 2.5
- सिरसा में खराब और पंचकूला में मध्यम
जिला एक्यूआई प्रदूषण कारक तत्व
सिरसा खराब    293 पीएम 10
पंचकूला मध्यम  144 पीएम 2.5
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पीएम 2.5 को जानिए

पीएम 2.5 हवा में खुलने वाला अति सूक्ष्म कण है जिसका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। यह इतना छोटा होता है कि इसके 40 कण मनुष्य के बाल पर रखे जा सकते हैं। पीएम 2.5 हमारे फेफड़ों में काफी गहराई तक पहुंच जाता है।

यह सूक्ष्म कण बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इससे आंख और गले में तकलीफ बढ़ जाती है। खांसी के साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होती है। इसके लगातार संपर्क में रहने से फेफड़े का कैंसर भी हो सकता है। पीएम 2.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए

पीएम 10 को जानिए
पीएम 10 के कण का आकर 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। यह धूल, कंस्ट्रक्शन वर्क और पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है। पीएम 10 का सामान्य लेवल 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर होना चाहिए।  

एक्यूआई में पीएम 2.5 और पीएम 10 समेत आठ प्रदूषक तत्व होते हैं  एक्यूआई की गणना में पीएम 2.5 और पीएम 10 समेत आठ प्रदूषक तत्व होते हैं। इनमें सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन ड्राईऑक्साइड समेत अन्य तत्वों को शामिल किया जाता है।
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