प्रोग्रेसिव पंजाब एग्रीकल्चर समिट में चार दिन के मंथन के बाद किसानी बचाने का सबसे बड़ा दारोमदार किसानों पर ही आया है। पर राज्य सरकार किसानों की हरसंभव सहायता करेगी।
माहिर और विभाग भी अपने स्तर पर मदद करेंगे। जो अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं, उनके लिए चार महीने बाद सब मिलकर संघर्ष करेंगे।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बुधवार को आखिरी सेशन के दौरान इस अंदाज में सभी को उनकी जिम्मेदारियां समझाईं। किसानों से कहा कि मेहनत सब करते हैं, कुछ आगे निकल जाते हैं।
रिसर्च का सहारा लेकर किसान आगे बढ़ें। माहिरों से कहा कि जो बस में होगा करूंगा, पर किसानों को सुसाइड करते नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि अगले साल यह समिट और शानो-शौकत से होगा।
सीएम ने कहा कि खेती क्राइसिस में है, जिन्हें हल करना है, वे समझ नहीं रहे, वह तो दूर ध्यान तक नहीं दे रहे। पर अब बीमारी समझ गए हैं। इसका हल किसी एक के पास नहीं है।
आमदनी-खर्च केंद्र तय करता है, तय करते समय राज्यों से पूछा तक नहीं जाता। किसानों को अनस्किल्ड लेबर मानते हैं। कारें सस्ती कर दीं, खेती औजारों पर एक्साइज ड्यूटी कम नहीं करते। अच्छे बीज देना यूनिवर्सिटी का काम है। बाहर रिसर्च पर बहुत जोर देते हैं। पर यूनिवर्सिटीज को फंड नहीं मिलते। केंद्र को चाहिए कि दो फीसदी बजट खेती रिसर्च पर लगाए। दिल्ली में दूसरी लड़ाई चल रही है, 3-4 महीने में रिजल्ट आ जाएगा, फिर मिलकर जोर लगाएंगे।