किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ दशहरे पर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारपोरेट कंपनियों के मालिकों के पुतले फूंकने का एलान किया है। अमृतसर में चल रहे धरने के दौरान किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश के किसान संगठनों को दिए गए बातचीत के न्योते को वे स्वीकार नहीं करेंगे। क्योंकि केंद्र सरकार बातचीत के बहाने पंजाब के किसान संगठनों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश में है।
इस बीच, हरियाणा में रोष प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए किसानों ने वहां के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और प्रधानमंत्री मोदी के पुतले फूंककर रोष जताया। संगरूर और सुनाम में भी किसान एक सप्ताह से रेलवे ट्रैक पर डटे हैं। जबकि गांव बेनड़ा में किसानों ने पेट्रोल पंप घेर रखा है। लुधियाना में विभिन्न किसान यूनियनों ने जालंधर-लुधियाना राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाडोवाल टोल प्लाजा पर धरना दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इस दौरान जाम लगने की संभावना को देखते हुए टोल प्लाजा कर्मियों ने वाहन चालकों को बिना टोल लिए निकलने दिया। वहीं कृषि कानूनों का समर्थन करने के लिए होशियारपुर पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा को किसानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद किसान सुरक्षा अवरोध पार कर प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल पर पहुंच गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
पटियाला में किसानों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले किसानों ने गांव धबलान में रेलवे ट्रैक जाम किया। वहीं, पातड़ां के न्याल और समाना में एक कारपोरेट घराने के पेट्रोल पंप पर धरना दिया।