कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने बैंस को बताया है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग क्षेत्रीय स्तर पर राज्यों की बैठक राज्य में ही करवाता है। बैठक में आयोग किसानों एवं कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से विस्तारपूर्वक चर्चा करता है। इसमें राज्यों के किसान प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक व संबंधित विभाग के अधिकारी भाग लेते हैं।
इसके आधार पर आयोग केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिशें करता है। वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 में कृषि विभाग ने अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य की कोई भी सिफारिश नहीं भेजी। चढ़ूनी व बैंस ने नाराजगी जताते हुए कहा, इससे स्पष्ट होता है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को प्रदेश सरकार ने कोई तुलनात्मक वक्तव्य भेजा ही नहीं। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार धरातल पर कुछ भी नहीं कर रही।
राकेश ने इन तीन बिंदुओं पर मांगी थी आरटीआई
. वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 की हरियाणा में खरीफ व रबी की फसलों की कृषि लागत, कीमतों और एमएसपी के तुलनात्मक वक्तव्य की जानकारी।
. कृषि विश्वविद्यालय हरियाणा द्वारा निकली गई सभी फसलों की लागत की वर्ष 2017-18, 2018-19 की जानकारी।
. वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 की हरियाणा में खरीफ व रबी की फसलों की कृषि लागत, कीमतों व एमएसपी के तुलनात्मक वक्तव्य की केंद्र सरकार को लिखे पत्रों की प्रति।