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बाजरे के रकबे पर सरकार की नजर, कृषि अधिकारियों की फौज उतारी, गड़बड़ी की आशंका

Sun, 13 Sep 2020 01:49 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • पहली बार डेढ़ हजार से अधिक कृषि अधिकारी, कर्मचारी करेंगे भौतिक सत्यापन
  • अभी तक 10 लाख हेक्टेयर रकबे में बाजरे की फसल का हो चुका रजिस्ट्रेशन
  • पंजाब-राजस्थान के किसानों से सस्ता बाजरा खरीद हरियाणा की मंडियों में बेचने की फिराक में रहते हैं दलाल
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बाजरा (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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हरियाणा सरकार को आशंका है कि इस बार भी कहीं बाजरे की फसल के आवक के आंकड़ों में गड़बड़ी न हो जाए। पोर्टल पर जितनी रजिस्ट्रेशन बाजरे के रकबे की हुई है। कहीं उससे ज्यादा बाजरा मंडियों में बिकने न पहुंच जाए। इसी आशंका के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने हरियाणा में बाजरे के रकबे पर अपनी पूरी नजर गाढ़ रखी है। इस काम के लिए पहली बार सरकार ने डेढ़ हजार से अधिक कृषि अफसर व कर्मचारियों की फौज को निगरानी के लिए फील्ड में उतारा है।

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हरियाणा में बाजरे की फसल का अच्छा रकबा है। वैसे तो सूबे के हर जिले में बाजरा लगाया जाता है। मगर दक्षिणी-पश्चिमी जिलों में तो इसकी अच्छी खासी खेती होती है। उधर, सरकार ने भी दावा किया है कि प्रदेश के हर किसान के बाजरे का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। बशर्ते बाजारा उत्पादक सभी किसान अपने बाजरे के रकबे का रजिस्ट्रेशन ‘मेरी-फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल’ पर जरूर करवाएंगे। 

अभी तक देखा जाए तो प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक बाजरे की फसल का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर हो चुका है। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन तो ठीक है। मगर शंका इस बात की है कि क्या वाकई लाखों हेक्टेयर बाजरे की फसल हरियाणा के खेतों में खड़ी है। इसी शंका के निदान के लिए सूबे की सरकार ने पहली बार इतने बड़े कृषि विभाग के स्टाफ को लगाकर एक मैराथन एक्सरसाइज शुरू करवाई है।

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विभाग का ये स्टाफ बाजरे की फसल पककर मंडियों में आने से पहले पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाई गए बाजरे की फसल के रकबे का फिजिकल वेरीफिकेशन करेगा। स्टाफ फील्ड में जांच के बाद सत्यापित करेगा कि संबंधित किसान द्वारा पोर्टल पर जो जानकारी दी है, वह सही है। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।

बाजरे के सीजन में दलाल रहते हैं सक्रिय 
विभागीय सूत्रों ने बताया कि हरियाणा के सीमावर्ती प्रदेशों खासकर राजस्थान और पंजाब में भी किसान बाजरा बोता है। मगर वहां अमूमन बाजरे की खरीद उचित समर्थन मूल्य पर नहीं हो पाती। इन प्रदेशों में दाम काफी पिट जाता है और किसान को प्राइवेट ही अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है। 

किसानों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं इस फील्ड के दलाल। सूत्रों ने बताया कि ये दलाल यहां हरियाणा के कुछ आढ़तियों व किसानों से मिलीभगत कर दूसरे राज्यों में सस्ता खरीदा बाजरा यहां हरियाणा की मंडियों में पूरे समर्थन मूल्य पर बेचने का प्रयास करते हैं। बाजरा बिक गया तो इस काम में लगी पूरी ‘चेन’ को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है। सरकार बाजरा खरीद के इसी गड़बड़झाले और दलाल के नेटवर्क को इस बार तोड़ना चाहती है।

सरकार इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि हरियाणा के सभी किसानों का पूरा बाजरा पूरे समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। ताकि हमारे किसानों को इस फसल से अच्छा मुनाफा हो। मगर कुछ लोग पंजाब व राजस्थान का बाजरा वहां के किसानों से सस्ता खरीदकर हरियाणा की मंडियों में मिलीभगत कर बेचने का प्रयास करते हैं। इसी पर नकेल कसनी है। 
दूसरे राज्यों के किसानों की फसलें उन्हीं के राज्यों में उचित समर्थन मूल्यों पर बिके, यह संबंधित राज्यों किसानों का अधिकार भी है और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी भी। हरियाणा अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। लिहाजा दूसरे राज्यों को भी इस जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए। इस बार डेढ़ हजार से अधिक कृषि कर्मचारियों की टीम को बाजरे की फिजिकल वेरीफिकेशन के लिए मैदान में उतारा है। - संजीव कौशल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग
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