सेक्टर-15 शिशु गृह के दो कमरों तक सिमटी बच्चों की जिंदगी में रोजाना नई मुसीबतें आने लगी हैं।
अब तक जगह कम होने की वजह से उन्हें चहलकदमी में दिक्कतें उठानी पड़ती थी और अब एक-दूसरे से फैल रहे इनफेक्शन की वजह से उनकी तबीयत पर बात बन आई है।
शिशु गृह की चार माह की संचिता को सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसे तीन दिनों से बुखार था और सांसें तेज हो गई थीं।
बच्ची के टेस्ट किए गए हैं और बुधवार को इनकी रिपोर्ट मिलेगी। इसके अलावा तीन और बच्चों को बुखार है। इससे पहले छह बच्चे डिलेड माइल्ड स्टोंस के शिकार हो चुके हैं।
इस बीमारी में बच्चों का शारीरिक-मानसिक विकास प्रभावित होता है।
एसीपी ने जाना बच्चों का हाल
शिशु गृह में बच्चों का हाल जानने के लिए मंगलवार को प्रशासन की तरफ से एसीपी ममता सौदा पहुंचीं और कर्मचारियों से पूछताछ की।
कर्मचारियों के अनुसार, 47 बच्चों के रहने के लिए यहां सिर्फ दो कमरे हैं, लेकिन इस समस्या के समाधान पर प्रशासन का ध्यान नहीं है।
कई कर्मचारियों ने एसीपी को बताया कि सच के पक्ष में आवाज उठाने पर समस्या के समाधान के बजाय उल्टा उनकी ही कमियां निकालने पर फोकस किया जाता रहा है, लेकिन मुख्य समस्या बच्चों की चहलकदमी व आराम के लिए जगह कम होना है।
लाइब्रेरी के कंट्रोलर ने मांगा 10 दिनों का और समय
शिशु गृह के अधिकारियों से लाइब्रेरी के कंट्रोलर ने खाली करने के लिए 10 दिनों का और समय मांगा है, लेकिन शिशु गृह के अधिकारियों ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है। यहां 47 बच्चों के लिए जितनी जगह नहीं है, उतनी जगह लाइब्रेरी ने घेर रखी है।
हायर एजुकेशन ने 18 मार्च तक का समय मांगा था, लेकिन लाइब्रेरी अभी तक खाली नहीं किया गया है। इस संबंध में उपायुक्त पंचकूला से बात करूंगी, क्योंकि एक बच्ची की तबीयत भी खराब है।
पूनम सूद, एडॉप्शन आफिसर, चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल