सेना के फार्म में तैनात एक फौजी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर उसकी पत्नी की ओर से दायर 10 लाख रुपये के विशेष मुआवजे की याचिका केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने खारिज कर दी।
कैट ने अपने आदेश में कहा है कि फौजी किसी विषम परिस्थितियों वाली पोस्ट पर तैनात नहीं था। ऐसे में उनकी मृत्यु पर किसी तरह के मुआवजे का हक नहीं बनता।
मामले के अनुसार सेना के पठानकोट स्थित फार्म पर तैनात जगदेव सिंह की 17 नवंबर 2010 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी बीना देवी ने कैट में याचिका दायर कर सेना से 10 लाख रुपये का मुआवजा मांगा था।
ट्रिब्यूनल ने 3 जुलाई 2013 को पत्नी के हक में फैसला सुना दिया था। कैट ने अपने फैसले में जगदेव की पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजा ब्याज सहित अदा करने के लिए सेना को आदेश दिए थे।
सेना की ओर से इस फैसले के खिलाफ 2013 में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। इसे कैट ने 31 जनवरी 2014 को मंजूर कर लिया था। सेना की ओर से उनके वकील जीएस साथी ने कहा कि जगदेव सिंह की ड्यूटी फार्म में थी। यह उसकी रुटीन जॉब थी।
इसके अलावा वह ऐसी किसी पोस्ट पर तैनात नहीं था, जहां किसी तरह का जान का खतरा हो। ऐसे में उसकी पत्नी द्वारा मुआवजे की मांग उचित नहीं है। कैट ने दलील को सही मानते हुए मुआवजे की अपील खारिज कर दी।